वज्रपात का बढ़ता कहर, जून में चार की मौत, मानसून से पहले बढ़ी चिंता

Published by : SANJEET KUMAR Updated At : 10 Jun 2026 10:36 PM

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लगातार घटनाओं के बाद मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट, प्रशासन ने जारी की सतर्कता सलाह

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गोड्डा जिले में वज्रपात की लगातार हो रही घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में पथरगामा प्रखंड के बरमसिया हाट में वज्रपात से दो लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना के बाद अब यह मुद्दा गंभीर चर्चा का विषय बन गया है. मानसून के आगमन से पहले जिले में वज्रपात की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मौसम विभाग लगातार ऑरेंज अलर्ट जारी कर रहा है. जानकारी के अनुसार, जून माह में अब तक वज्रपात की चपेट में आकर चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं. इसके अलावा कई मवेशियों की भी जान गयी है. लगातार हो रही इन घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में भय का माहौल पैदा कर दिया है.

पिछले कुछ दिनों में दर्दनाक घटनाएं

23 मई को नगर थाना क्षेत्र के अमरपुर कदवा टोला में आंधी-तूफान के दौरान वज्रपात से दो मवेशियों की मौत हो गयी थी. 6 जून को बलबड्डा थाना क्षेत्र के खिरौंधा गांव में धान का बिचड़ा देखने गये अमरेंद्र मंडल की बिजली गिरने से मौत हो गयी. इसी दिन शांतिनगर बहियार में एक दुधारू गाय भी वज्रपात की चपेट में आ गयी थी. वहीं सदर प्रखंड के मालिनी गांव में बकरी चराने गयी महिला सोनी देवी की भी जान चली गयी थी. इसके बाद 9 जून को पथरगामा के बरमसिया हाट में हुई वज्रपात की घटना में दो लोगों की मौत और पांच लोगों के गंभीर रूप से घायल होने से पूरे जिले में दहशत का माहौल बन गया.

मौसम वैज्ञानिकों ने बतायी वजह

कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक रजनीश प्रसाद राजेश के अनुसार, मई-जून के दौरान अत्यधिक गर्मी और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी के मेल से गरज वाले बादल तेजी से बनते हैं. बढ़ते तापमान के कारण बादलों में विद्युत आवेश अधिक उत्पन्न होता है, जिससे वज्रपात की घटनाएं बढ़ रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ताड़ और खजूर जैसे ऊंचे पेड़ों की संख्या घटने से प्राकृतिक तड़ित चालक कम हो गये हैं, जिसके कारण बिजली सीधे जमीन, मकानों, इंसानों और मवेशियों पर गिर रही है.

मानसून से पहले सतर्क रहने की जरूरत

मौसम विभाग के अनुसार 15 से 18 जून के बीच जिले में मानसून के प्रवेश की संभावना है. ऐसे में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक और वज्रपात की घटनाएं जारी रह सकती हैं. प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, खेतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें. मौसम खराब होते ही सुरक्षित भवनों में शरण लें तथा मौसम विभाग की चेतावनियों पर विशेष ध्यान दें. विभाग ने लोगों को दामिनी ऐप का उपयोग करने की भी सलाह दी है, ताकि वज्रपात की पूर्व सूचना प्राप्त हो सके. जिले में लगातार बढ़ रही वज्रपात की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता ही सबसे प्रभावी उपाय है.

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