व्रतियों ने उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर पूरा किया चैती छठ पर्व

गोड्डा में चार दिवसीय छठ महापर्व का भव्य समापन
सनातन धर्म में आस्था का महा पर्व छठ पूजा का विशेष महत्व है. बुधवार सुबह गोड्डा नगर क्षेत्र के व्रतियों ने हनुमंत अखाड़ा तालाब, गोढ़ी घाट तालाब, राजकचहरी तालाब, भतडीहा तालाब और कझिया नदी घाट पर उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन किया. जिला मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखंडों में भी व्रतियों ने विधिविधान के अनुसार पूजा और अर्घ्य दिया. चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में श्रद्धालु उपवास और पूजा-अर्चना के माध्यम से सूर्य देव और माता छठी की उपासना करते हैं. जानकारी के अनुसार, प्रत्येक वर्ष छठ पर्व दो बार मनाया जाता है-एक चैत्र मास में और दूसरा कार्तिक मास में. चैत्र मास में मनाये जाने वाले चैती छठ में विशेष रूप से सूर्य देव की उपासना की जाती है. पंडितों का कहना है कि चैत्र मास और कार्तिक मास में मनाये जाने वाले छठ पर्व का समान धार्मिक महत्व है. दोनों पर्वों में श्रद्धालु भगवान सूर्य देव और माता छठी की पूजा-अर्चना करते हैं. यह पर्व समाज में आस्था, संयम और पारिवारिक एकता का संदेश भी देता है.
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