ऐतिहासिक तालाब में हजारों भक्तों ने लगायी आस्था की डुबकी

Updated at : 15 Apr 2024 12:12 AM (IST)
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ऐतिहासिक तालाब में हजारों भक्तों ने लगायी आस्था की डुबकी

बिसुआ मेला में पहुंचे कई राज्यों के श्रद्धालु, झूला व नौटंकी में करतब का लिया आनंद

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बसंतराय. प्रखंड मुख्यालय में रविवार को बिसुआ पर्व के अवसर पर ऐतिहासिक बसंतराय तालाब किनारे मेले का आयोजन किया गया है. हजारों श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक तालाब में आस्था की डुबकी लगायी. सफाहोड़ के श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ देखी गयी. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ऐतिहासिक तालाब में स्नान कर सूर्य देवता की पूजा-अर्चना की जाती है. बताया गया कि प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले बिसुआ पर्व के मौके पर आयोजित मेले में सफा होड़ के अनुयायी बड़ी संख्या में आते हैं. बताया जाता है कि आसपास कई प्रदेशों के लोग मेले में पहुंचते हैं. तालाब में स्नान कर तालाब किनारे शिक्षा प्राप्त करते हैं. फल स्वरूप मौके पर महीने भर चलने वाले विराट मेले में मनोरंजन के अनेक सामान भी देखे गये. आकर्षक झूले के साथ श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए कई प्रकार के नौटंकी करतब आदि भी लगा है. मौके पर जुटी भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किया गया है. जानकारी के मुताबिक आमजनों की सुविधा का ध्यान में रखते हुए जगह-जगह प्रशासन के द्वारा सहायता शिविर लगाया गया है. सबसे महत्वपूर्ण उमस भरी गर्मी में श्रद्धालुओं को शुद्ध पेयजल के लिए भटकते देखा गया. कहीं भी शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं देखी गयी. श्रद्धालुओं को सील बंद बोतल से अपनी प्यास बुझाते देखा गया. वहीं गाड़ियों की लंबी कतार से हुए जाम में लोगों को तपती धूप में भारी जाम का भी दंश झेलना पड़ा. पांच सौ वर्षों से चली आ रही है परंपरा 14 अप्रैल को बैसाखी या सतुवानी के मौके पर लगने वाला यह मेला का इतिहास काफी पुराना है. मेले में आनेवाले लोग तालाब में स्नान कर अपनी अपनी मन्नत के मुताबिक बकरा बकरी कबूतर आदि तालाब में ही विसर्जित कर देते हैं, जिसे आसपास के लोगों के द्वारा पानी से तुरंत निकाल लिया जाता है. तालाब के पानी में स्नान करने के बाद बड़ी नियम और निष्ठा के साथ पूजन कर दीक्षा भी लेते हैं. सफा होड़ समुदाय के लोगों का यह अनुष्ठान दिन-रात चलता है सभी एक स्थान पर स्वयं तैयार किए शाकाहारी भोजन करते हैं जिसमें प्याज व लहसुन वर्जित रहता है, जिसे खाकर वापस घरों को लौट जाते हैं.

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