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ललमटिया खदान धंसने की हो कोर्ट ऑफ इंक्वायरी

एचएमएस के महासचिव हरभजन सिंह सिधू ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र कोयला मजदूर कांग्रेस के महासचिव एसके पांडेय जायेंगे घटनास्थल पर चार को आसनसोल/गोड्डा : इसीएल की राजमहल परियोजना की ललमटिया खदान में हुयी दुर्घटना में 18 श्रमिकों की मौत के मामले में हिंद मजदूर सभा (एचएमएस) के महासचिव हरभजन सिंह सिंधू ने केंद्रीय […]

एचएमएस के महासचिव हरभजन सिंह सिधू ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

कोयला मजदूर कांग्रेस के महासचिव एसके पांडेय जायेंगे घटनास्थल पर चार को
आसनसोल/गोड्डा : इसीएल की राजमहल परियोजना की ललमटिया खदान में हुयी दुर्घटना में 18 श्रमिकों की मौत के मामले में हिंद मजदूर सभा (एचएमएस) के महासचिव हरभजन सिंह सिंधू ने केंद्रीय क्षम व रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को पत्र लिख कर इसकी कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की मांग की है. उन्होंने इस संबंध में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को अलग से पत्र लिखा है. उन्होंने मुआवजे राशि में भी वृद्धि की मांग की है. एचएमएस से संबद्ध कोलियरी मजदूर कांग्रेस के महासचिव एसके पांडेय ने कहा कि दुर्घटना के बाद ही इसीएल मुख्यालय स्तरीय सुरक्षा कमेटी के सदस्य देवनाथ यादव के नेतृत्व में जानकारों की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की. टीम ने इस संबंध में यूनियन नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपी है.
उस पर आधारित होकर केंद्रीय यूनियन एचएमएस के महासचिव श्री सिधू ने केंद्रीय श्रम व रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को पत्र लिखकर कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की मांग की है. खदान के झारखंड में होने के कारण वहां के मुख्यमंत्री श्री दास को भी पत्र लिखा गया है. श्री पांडेय ने कहा कि यह मामला काफी गंभीर है तथा श्रमिकों के जीवन तथा सुरक्षित खनन में हो रही लापरवाही से जुड़ा है. अपने किस्म का अलग घटना होने के कारण आगामी चार जनवरी को उनके नेतृत्व में कमेटी घटनास्थल पर जाकर स्थिति तथा कारणों की समीक्षा करेगी. इसके बाद यूनियन की अगली रणनीति तय होगी. एचएमएस के महासचिव श्री सिधू ने अपने पत्र में कहा है कि महालक्ष्मी कंपनी के स्तर से इसीएल के पैच में हो रहे खनन में हुयी दुर्घटना में बीते 29 दिसंबर को 18 श्रमिकों की मौत हो गयी है. ओवरबर्डेन भारी मशीनों की मदद से हटाये जाने के दौरान हुयी. करीब 9.5 मिलियन क्यूबिक मीटर मिट्टी-पत्थर का मलवा धंस गया. उन्होंने कहा कि खान सुरक्षा महानिदेशालय ने इसकी जांच कमेटी गठित की है. सीआइएल ने भी विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है.मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है. उन्होंने कहा कि सरकारी नीति के तहत उत्पादन कर रही निजी कंपनी के स्तर से सुरक्षा में भारी लापरवाही की गयी है.
श्रम कानूनों का उल्लंघन कर सुरक्षा प्रावधानों को ताक पर रख कर ये कंपनिया ं कार्य करती हैं. उन्होंने कहा कि मृतकों की संख्या पांच से अधिक होने के कारण इसकी विभागीय जांच न होकर कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी होनी चाहिए. घोषित मुआवजे की राशि कम है. मृतकों के परिजनों तथा घायलों को पर्याप्त राशि मुआवजे के रूप में मिलनी चाहिए. उन्होंने मृतकों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियोजित करने की मांग की है. श्री सिधू ने कहा कि जांच में उत्तर दायित्व तय होना चाहिए तथा दोषी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए. इसके साथ ही मृत तथा घायल श्रमिकों की सूची सार्वजनिक हो. उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिग कर रही निजी कंपनियों के द्वारा संचालित खदानों में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति पर रोक लगनी चाहिए.
मुख्यमंत्री श्री दास को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि स्थानीय नेताओं, ठेकेदारों थथा अधिकारियों की मदद से इलाके में कोयले का अवैध खनन चल रहा था. इसका खामियाजा श्रमिकों को भुगतना पड़ा है. उन्होंने कहा कि उनकी यूनियनें बिना नियंत्रण आउटसोर्सिग का विरोध करती रही है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के स्तर से भी इनकी जांच नियमित रूप से होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा काफी कम है. मृतकों के परिजनों को नियोजन के साथ-साथ घायलों को भी पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए.
Prabhat Khabar Digital Desk
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