कर्मियों ने निकाला दो सहकर्मियों का शव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Dec 2016 8:40 AM (IST)
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दिन के ग्यारह बजे गोड्डा : इसीएल जिसे एशिया का सबसे बड़ा ओपन कोल माइंस की संज्ञा प्राप्त है, के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े हादसे के रूप में भूस्खलन दर्ज हुआ है. 41 लोगों के दब जाने के बाद राजमहल कोल परियोजना जिला प्रशासन से लेकर सरकार तक के लिये चुनौती बन […]
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दिन के ग्यारह बजे
गोड्डा : इसीएल जिसे एशिया का सबसे बड़ा ओपन कोल माइंस की संज्ञा प्राप्त है, के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े हादसे के रूप में भूस्खलन दर्ज हुआ है. 41 लोगों के दब जाने के बाद राजमहल कोल परियोजना जिला प्रशासन से लेकर सरकार तक के लिये चुनौती बन गयी है.
रात के करीब साढ़े सात-आठ बजे अचानक हुये भूस्खलन में महालक्ष्मी प्राइवेट कंपनी की रात के शिफ्ट में काम करने वाले लोगों के दबने के बाद से ही ललमटिया से दिल्ली तक संवाद से जुड़ गया. कोयला मंत्री ने देर रात घटना की पूरी जानकारी मांगा, तो कोयला महकमा से जिला प्रशासन तक सक्रिय हो गया. जिला मुख्यालय से ललमटिया के लिये अधिकारी पहुंचने लगे.
आनन -फानन में इसीएल ने रातो रात मलवे को डोजरिंग कर सड़क बना दिया गया. तर्क यह था कि डीप माइनिंग के समीप तक राहत कार्य करने के लिये ऐसा निर्णय लेना पड़ा. इस संवेदनहीन निर्णय पर लोगों का आक्रोश था. लोगों का कहना था कि आखिर किस वजह से ऐसा किया गया, जबकि मलवा से लाश निकाले बगैर सड़क बना देने का कारण समझ से परे है.
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