संवेदनहीनता. ऑपरेशन में पैसे कम रहने के कारण चिकित्सक ने नहीं दिखायी तत्परता
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :17 Apr 2016 8:59 AM (IST)
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डाक्टर करते जिंदगी से खिलवाड़ प्रसूता आशालीना हेंब्रम की मौत से शहर के निजी क्लिनिक की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रही है. वहीं सरकार के संस्थागत प्रसव कराने के दावे की भी पोल खोल रही है. सीएचसी से सदर अस्पताल रेफर करना. फिर निजी क्लिनिक भेजने के मामले की जांच होनी चाहिए. गोड्डा : […]
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डाक्टर करते जिंदगी से खिलवाड़
प्रसूता आशालीना हेंब्रम की मौत से शहर के निजी क्लिनिक की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रही है. वहीं सरकार के संस्थागत प्रसव कराने के दावे की भी पोल खोल रही है. सीएचसी से सदर अस्पताल रेफर करना. फिर निजी क्लिनिक भेजने के मामले की जांच होनी चाहिए.
गोड्डा : पोड़ैयाहाट के अमुवार गांव की आशालीना हेंब्रम ने स्वस्थ शिशु को जन्म देकर दुनिया से बिदा ले चुकी है. लेकिन अपनी मौत के पीछे प्राइवेट क्लीनिक की व्यवस्था के खिलाफ सवाल खड़ी कर गयी है. ऑपरेशन के खर्च में पांच हजार रुपये नहीं दिये जाने व डाक्टर द्वारा तत्परता नहीं दिखाने व ऑपरेशन देर से करने के कारण उसकी मौत हो गयी है.
एक ओर सरकार व विभाग संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सीएचसी, पीएचसी, एडिशनल पीएचसी व उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर प्रसव करा रही है. पोड़ैयाहाट सीएचसी से प्रसूता को क्यों गोड्डा रेफर किया गया यह भी एक बड़ा सवाल है. जब उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी. तब ऑपरेशन की नौबत आ गयी. सदर अस्पताल में भी महिला की स्थिति देखकर क्यों नहीं त्वरित कार्रवाई की गयी. यह यक्ष प्रश्न सिस्टम के सामने खड़ा हो रहा है.
सदर अस्पताल में इस मामलों को गंभीरता से क्यों नहीं लियाग या यह भी जांच का विषय है. वहां से महिला को कौन िनजी क्लिनिक में दिखाने की सलाह दी इसकी भी तहकीकात होनी चाहिए.
कुल मिला कर यही कहा जाये कि निजी क्लिनिकों में मरीजों के साथ आर्थिक दोहन विभिन्न प्रकार की जांच कराकर व ऑपरेशन के नाम पर मोटी रािश लेकर किया जाता रहा है. इस घटना से आक्रोशित लोगों ने ऐसे क्लिनिकों के संचालन पर रोक लगाने की मांग प्रशासन से की है.
कई बार हो चुकी है ऐसी घटनाएं
आशालीना के मामले में सख्त हुए प्रदीप यादव
आशालीना हेंब्रम के प्रसव के दौरान मौत होने के मामले को लेकर शनिवार को पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव सदर अस्पताल पहुंचे. सख्त होते हुए श्री यादव द्वारा सीएस को लिखित देकर निजी क्लिनिक पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने बताया कि जिले में यह पहली घटना नहीं है.
दस पंद्रह वर्षों से लगातार निजी क्लिनिकों में ऐसा देखा जा रहा है. पैसा ऐंठने का जरिया बना लिया गया है. सरकारी अस्पताल से प्राइवेट अस्पताल में ले जाने का कार्य हो रहा है. सिविल सर्जन से सारे मामलों पर जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
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