भाइयों को तन ढकने लायक कपड़े भी नसीब नहीं, गरीबी में परिवार

Published at :12 Apr 2016 9:05 AM (IST)
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भाइयों को तन ढकने लायक कपड़े भी नसीब नहीं, गरीबी में परिवार

मालोती का डॉक्टरों ने किया हेल्थ रिव्यू सदर अस्पताल में भरती पहाड़िया लड़की मालोती टुडू के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है. बुखार व दम फूलने की शिकायतें दूर हो गयी है. सोमवार को अनाथ आश्रम संचालिका वंदना दुबे ने गाड़ी की व्यवस्था कर उसके भाइयों व नानी को अस्पताल में बुलवाया. अपने […]

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मालोती का डॉक्टरों ने किया हेल्थ रिव्यू
सदर अस्पताल में भरती पहाड़िया लड़की मालोती टुडू के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है. बुखार व दम फूलने की शिकायतें दूर हो गयी है. सोमवार को अनाथ आश्रम संचालिका वंदना दुबे ने गाड़ी की व्यवस्था कर उसके भाइयों व नानी को अस्पताल में बुलवाया. अपने परिवार को देखकर बच्ची काफी खुश है.
गोड्डा : सदर अस्पताल में भरती चंदना की मालोती टूडू का सोमवार को स्वास्थ्य रिव्यू किया गया. अस्पताल के चिकित्सक प्रदीप कुमार सिंहा द्वारा मालोती की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक पूछताछ की गयी. डॉ सिंहा ने बताया कि तब मालोती अस्पताल में भरती हुई थी. उस समय उसे तेज बुखार के साथ दम फूलने की शिकायत थी. इलाज के बाद उसका दम फूलना बंद हो गया है. बुखार भी नहीं है. पेट दर्द हमेशा रहने को लेकर इलाज किया जा रहा है. इस मामले में भी सुधार हो रहा है. बेहतर दवा से इलाज हो रहा है.
नानी व तीन भाई पहुंचे मालोती के पास : सदर अस्पताल में मालोती नानी सहित तीन भाई पहुंच गये हैं. अपने परिवार को पास पाकर मालोती खुश हुई. देखरेख कर रही अनाथ आश्रम की संचालिका सुश्री बंदना दुबे द्वारा वाहन की व्यवस्था कर चंदना स्थित नानी घर से नानी व भाइयों को अस्पताल लाया गया.
अनाथ आश्रम से मिला कपड़ा
तन ढकने लायक कपड़े तक नहीं थे नाना के पास
बंदना दुबे ने बताया कि जब मालोती के नानी घर पहुंचे तो परिवार की स्थिति देख वे दंग रह गयी. मालोती के नाना दारू के नशे में धुत होकर घर के एक कोने में पड़े थे. मालोती का दो भाई माइकल टुडू व प्रेम टुडू के तन ढ़ंकने लायक एक कपड़ा तक नहीं था. गोड्डा लाने के बाद अनाथ आश्रम ले जाकर अनाथ बच्चों से एक जोड़ा कपड़ा दोनो भाइयों को पहना कर मालोती के पास अस्पताल पहुंचाया.
जनप्रतिनिधियों में अभी भी नहीं जगी संवेदना
मालोती का परिवार मुफलिसी (गरीबी) में है. इसके बाद भी जनप्रतिनिधि उसकी सुधि लेने अस्पताल तक नहीं आये हैं.
पहाड़िया परिवार को वाजिब हक दिलानेवाले नुमाइंदों की नींद नहीं खुली है. आर्थिक तंगी से गुजर रहे मातोली के परिवार के जख्मों पर मरहम लगाने की किसी को फुरसत नहीं है. मंच पर लंबे-लंबे कसीदें पढ़कर लोग सियासी रोटी सेंक लेते है. बंदना दुबे ने बताया कि नाम नहीं आउट करने की शर्त पर एक दो लोगों द्वारा पांच-छह सौ रुपये की मात्र मदद दी गयी है. इस पैसे से हॉर्लिक्स की व्यवस्था मालोती के लिए कर रहे हैं.
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