गरीबी बनी बाधा, छोटी ने छोड़ी पढ़ाई

चौका–बरतन कर मां चलाती है परिवार का खर्च गोड्डा : इच्छा तो थी कि पढ़ कर आगे बढ़ें और खूब नाम कमायें. लेकिन गरीबी बनी बाधा और बीच में ही छोटी की पढ़ाई छूट गयी. सरकार बालिकाओं की शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद जिले में बच्चियों को शिक्षा दिलाने […]
चौका–बरतन कर मां चलाती है परिवार का खर्च
गोड्डा : इच्छा तो थी कि पढ़ कर आगे बढ़ें और खूब नाम कमायें. लेकिन गरीबी बनी बाधा और बीच में ही छोटी की पढ़ाई छूट गयी. सरकार बालिकाओं की शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद जिले में बच्चियों को शिक्षा दिलाने को लेकर प्रशासन संवेदनशील नहीं है.
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार सर्वशिक्षा अभियान से वंचित लड़कियों के लिए कस्तूरबा विद्यालय का संचालन कर रही है. लेकिन इसका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा है. पोड़ैयाहाट प्रखंड के नवडीहा गांव के मुखिया टोला की रहनेवाली छोटी मुमरू अपनी हालत बयां करते–करते रो पड़ी.
उसने बताया कि जुलाई में उसके पिता की मौत होने के बाद से उसकी मां मीरु मरांडी दूसरे के घरों में चौका–बरतन कर किसी तरह घर चला रही है. इसे लेकर ही वह पढ़ाई से दूर हो गयी है. उसे पढ़ने का काफी शौक है लेकिन घर के काम व जिम्मेवारी की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा है. वहीं दूसरी ओर सरकारी सहायता नहीं मिलने की वजह से वह कई महीनों से पढ़ाई से दूर हो गयी है.
जिले में हैं आठ कस्तूरबा विद्यालय
जिले में आठ कस्तूरबा विद्यालय संचालित हैं. प्रत्येक विद्यालय में 300 ड्राप आउट छात्रओं को शिक्षा देने की व्यवस्था है. विभागीय सुत्रों के अनुसार अब कस्तूरबा विद्यालय में पढ़ाई छोड़ चुकी बालिका व गरीब घरों की लड़कियों का नामांकन नहीं हो रहा है.
कैसे होता है नामांकन
विभागीय जानकारी के अनुसार कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन के लिए अनाथ बच्चियों और लाल कार्डधारियों का नामांकन होना है.
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