महिला को डायन करार दिया, प्राथमिकी

Updated at :01 Sep 2013 4:05 AM
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महिला को डायन करार दिया, प्राथमिकी

बासुकिनाथ : जरमुंडी थानान्तर्गत चुरमुरिया गांव निवासी महिला नीरू मुमरू को गांव के ही लोगों ने डायन कहा. जान मारने की धमकी दिया. पंचायत में 12 हजार एक सौ रुपये जुर्माने भरे. फिर भी पीड़िता के साथ मारपीट किया गया. महिला जान बचाकर पुलिस के पास पहुंची. पीड़िता ने पुलिस से न्याय की गुहार लगायी […]

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बासुकिनाथ : जरमुंडी थानान्तर्गत चुरमुरिया गांव निवासी महिला नीरू मुमरू को गांव के ही लोगों ने डायन कहा. जान मारने की धमकी दिया. पंचायत में 12 हजार एक सौ रुपये जुर्माने भरे. फिर भी पीड़िता के साथ मारपीट किया गया. महिला जान बचाकर पुलिस के पास पहुंची. पीड़िता ने पुलिस से न्याय की गुहार लगायी है.

गांव के विनोद टुडू, बुधना मुमरू, जयनाथन मुमरू, रामेश्वर मरांडी, ग्राम प्रधान कलिया हेम्ब्रम तथा रामलाल मुमरू पर महिला ने डायन कह प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस मामले की जांच कर रही है.

मामला क्या है

चुरमुरिया गांव में लीलु टूडू लंबे समय से बीमार था. इसके पुत्र विनोद टुडू ने बीमारी को लेकर गांव में पंचायत बुलाया. ग्राम प्रधान कलिया हेम्ब्रम की अध्यक्षता में बैठक हुई. पंचों ने निर्णय दिया कि नीरू मुमरू डायन है इसी के चलते वह लंबे समय से बीमार चल रहा है. पंचों ने पहले 5051 रुपये का जुर्माना लगाया महिला ने सूद पर पैसा लेकर पंचों को दिया. इसी बीच रात में लीलू मुमरू की मौत हो गयी.

मृतक के पुत्र ने मौत का कारण महिला बताया. फिर कोरडिहा गांव के जानगुरू के पास ग्रामीण महिला को साथ में लेकर गये. जानगुरू ने महिला के कारण ही उसकी मौत हुई का पुष्टि कर दिया.

पंचों के निर्देश पर दूसरी बार पीड़िता उसके परिवार पर जुर्माना लगाया गया. पीड़िता ने किसी तरह फिर 5051 रुपये जुर्माने की राशि जानगुरू को दिया. जानगुरू ने आधा पैसा रखकर आधा गांव वालों को दे दिया. गाड़ी का भाड़ा, लोगों के खाने पीने के पैसे की मांग कुल दो हजार रुपये अतिरिक्त मांगी गयी. पीड़िता ने गाड़ी भाड़ा 1500 रुपये तो दे दिये लेकिन पांच सौ रुपये नहीं दे पायी. इसे लेकर गांव में फिर एक बार पंचायत बैठी. महिला को बुलाया गया.

ग्राम प्रधान अन्य आरोपियों ने मिलकर महिला का गला दबाने लगा. उसके पुत्र पति जब बचाने के लिए आगे आया तो उसे भी ग्रामीणों ने जमकर मारपीट किया. इसी बीच महिला ने जान बचा कर गांव से बाहर मकई के खेत में रात गुजारी.

सुबह होते ही महिला पुलिस के पास न्याय के लिए पहुंची. खैर जो भी हो ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी अंधविवासय कायम है. जागरूकता की कमी है. इसे दूर करने के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है.

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