असम में उल्फा के साथ मुठभेड़ में गोड्डा के श्रवण शहीद

Updated at : 01 Dec 2017 6:27 AM (IST)
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असम में उल्फा के साथ मुठभेड़ में गोड्डा के श्रवण शहीद

2010 में श्रवण कुमार ने आर्मी की नौकरी शुरू की थी ठाकुरगंगटी के खुटहरी गांव में मौत की खबर सुन पसरा मातम 2007 में हुई थी शादी, एक पुत्र व पुत्री समेत भरा परिवार छोड़ गया जवान मेहरमा/ठाकुरगंगटी : ठाकुरगंगटी प्रखंड के चंदा पंचायत के खुटहरी गांव के आर्मी जवान श्रवण कुमार उरांव वीरगति को […]

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2010 में श्रवण कुमार ने आर्मी की नौकरी शुरू की थी

ठाकुरगंगटी के खुटहरी गांव में मौत की खबर सुन पसरा मातम
2007 में हुई थी शादी, एक पुत्र व पुत्री समेत भरा परिवार छोड़ गया जवान
मेहरमा/ठाकुरगंगटी : ठाकुरगंगटी प्रखंड के चंदा पंचायत के खुटहरी गांव के आर्मी जवान श्रवण कुमार उरांव वीरगति को प्राप्त हुआ है. बुधवार को असम में उग्रवादी संगठन उल्फा के साथ हुए मुठभेड़ में श्रवण कुमार शहीद हुए. घटना की जानकारी मिलते ही परिवार व गांव के लोगों में मातमी सन्नाटा है. मां फूलो देवी पुत्र के शहीद होने की खबर सुनते ही बेहोश है. खबर सुनकर आस पास के लोग श्रवण के घर पहुंच रहे हैं. श्रवण कुमार उरांव की पोस्टिंग दो माह पहले सिक्किम में हुई थी.
इधर आॅपरेशन को लेकर असम में लगाया गया था. श्रवण बुधवार को उल्फा के साथ मुठभेड़ के क्रम में गोलियों से छलनी हो गया. गुरुवार को घटना की जानकारी घरवालों को मिलने पर गांव के लोग जुटने लगे. मामले की जानकारी पर एसडीपीओ राजा मित्रा, बीडीओ मनोज कुमार पहुंच कर घर वालों से मिलकर बताया कि शुक्रवार को शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा. गुरुवार को सिलीगुड़ी से सड़क मार्ग से भेजा गया है.
2010 में हुई थी नौकरी, पहली पोस्टिंग दानापुर में : श्रवण कुमार की शिक्षा आठवीं तक मवि कुपटी में हुई. मैट्रिक की परीक्षा ईशीपुर बाराहाट से दी थी. 2010 में श्रवण की नौकरी आर्मी में लगी पहली पोस्टिंग दानापुर में हुई थी. इसके बाद कोलकाता व दो माह पूर्व सिक्किम में कार्यरत था.
तीन भाई में श्रवण कुमार उरांव, राजीव उरांव व छोटा भाई संतोष उरांव है. राजीव दिल्ली में काम करता है तथा संतोष गांव में रहकर परिवार व मां पिता की देखभाल करता है. परिवार में श्रवण ही एकमात्र कमाऊं पुत्र था. पिता देवनारायण उरांव जानकारी के बाद से लगातार एकटक शहीद पुत्र के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहा है. देवनारायण का कहना है कि पुत्र को कर्ज लेकर पढ़ाया, नौकरी लगी, इस दौरान बेटी की शादी भी कर्ज लेकर किया. कर्ज में पूरा परिवार डूबा है और बुढ़ापे में सहारा जो अर्थी को कंधे देता श्रवण ही डूब गया. इस उम्र में पुत्र को कंधा देना पड़ेगा, भगवान ने क्या दिन दिखाया है. मगर यह भी कहता है कि मेरा पुत्र देश के लिये शहीद हुआ है इससे बड़े गर्व की बात कुछ और नहीं हो सकती.
गोड्डा की धरती के सपूत श्रवण कुमार उरांव को सलाम है, उनकी वीरता इतिहास में दर्ज होगा. विपत्ति के इस घड़ी में परिजनों के साथ हूं. हर मदद होगी करने को हमेशा तैयार हूं.
– निशिकांत दुबे, सांसद
” खबर सुन कर दुख हुआ मगर गर्व की बात है कि देश के लिये अपनी कुर्बानी देकर देश की रक्षा की है.
– अशोक भगत , विधायक महगामा.
2007 में निर्मला के साथ हुई शादी
श्रवण की शादी 2007 में निर्मला देवी के साथ हुई. दो बच्चों में छह साल का प्रीतम कुजूर व चार साल की बेटी शिवम कुजूर कोलकाता में अपनी मां के साथ रह रही है. पोस्टिंग के साथ ही कोलकाता में परिवार को रखकर श्रवण अपने बच्चे को स्कूल में पढ़ा रहा था.
ग्रामीणों में मातम, मगर धरती के वीर पुत्र पर गर्व
ग्रामीणों का तांता सुबह से ही श्रवण के घर में लगा है. स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि व मुखिया के अलावा कई लोग जुट रहे हैं. मुखिया प्रफुल्ल महतो, अशोक महतो, नंदेश्वर उरांव, अमित कुमार उरांव आदि का कहना है कि श्रवण पर पूरे गांव व क्षेत्र के लोगों को गर्व है. देश के लिये शहीद होकर जिला का नाम बढ़ाया है. लेकिन अपने करीबी को खोने का भी गम सभी को है. जिले का लाल ने उग्रवादियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए वीरगति को प्राप्त किया है. हमें गर्व है.
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