करीब 13 करोड़ की लागत से पुरानी जीटी रोड की मरम्मति और सौंदर्यीकरण का कार्य विगत दो साल पहले किया गया था. नेहरू स्मारक से लेकर साई मंदिर रोड के दोनों तरफ बारिश के पानी की निकासी के लिए नाली की समुचित व्यवस्था नहीं की गयी है और न तो बंद पड़ी नालियों को दुरुस्त करने का ही काम किया गया है. इस कारण बारिश का पानी सड़कों पर बह रहा है. वहीं पुरानी बगोदरडीह से लेकर माहुरी तक करीब चार किमी की जीटी रोड किनारे जहां- जहां नालियां बनायी भी गयीं. उन जगहों पर सड़क पर बहते पानी को नाली में जाने के लिए भी रास्ता ही नहीं छोडा़ गया है. इससे सड़क पर पानी बह रहा है और जल जमाव हो रहा है. इससे बरसात के दिनों में बगोदर बाजार की स्थिति नारकीय हो गयी है. बारिश का पानी सड़कों पर या फिर लोगों के घरों- दुकानों में प्रवेश कर रहा है. इससे राह चलनेवाले लोगों को बारिश के पानी में डूबकर जाना मजबूरी हैं. इसके अलावे हरिहरधाम श्मशान घाट के पास भी जलजमाव हो गया है. वहीं जीटी रोड़ संतुरपी, गैंडा फॉरेस्ट ऑफिस व पुल के पास भी जलजमाव हो गया है. सड़क का पानी नालिया में न जाकर रोड पर जमा हो जा रहा है. वहीं पानी की निकासी की जगह कहीं नहीं है. इससे आये दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं. बीते दिनों ही उक्त स्थल पर कार दुर्घटना हुई थी, जिसमें लोग बाल- बाल बच गए थे. इसके अलावे बगोदर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के टोले मोहल्ले में बारिश शुरू होते ही नाली के अभाव में जलजमाव हो जाता है. वहीं कई जगहों पर नालियां जाम रहने से भी यह स्थिति बन गयी है. जिप सदस्य दुर्गेश कुमार व समाजसेवी पवन पासवान ने जीटी रोड और पुरानी जीटी रोड पर नालियों की मरम्मति कराने और पानी की निकासी की मांग स्थानीय प्रखंड प्रशासन से की है.
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