Giridih News :अध्यात्म के साथ शिक्षा का अलख जगा रहा देवपहाड़ी शिव मठ

Edited by PRADEEP KUMAR
Updated:
विज्ञापन

Giridih News :देवरी प्रखंड के सबसे प्राचीन धरोहर में शुमार देवपहाड़ी शिव मठ न केवल अध्यात्मिक केंद्र है, बल्कि अब शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. सावन की पहली सोमवारी पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी.

विज्ञापन

सावन की पहली सोमवारी पर आज उमड़ेंगे श्रद्धालु

देवरी प्रखंड के सबसे प्राचीन धरोहर में शुमार देवपहाड़ी शिव मठ न केवल अध्यात्मिक केंद्र है, बल्कि अब शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. मठ में महंत गौरवानंद जी महाराज के नेतृत्व में संचालित बाबा जागनाथ धाम गुरुकुलम में एक सौ से अधिक बच्चों को निःशुल्क रूप से वेद की शिक्षा दी जा रही है. यहां के बटुक बालकों को वेद के साथ-साथ अन्य आवश्यक शिक्षा भी प्रदान की जा रही है. सावन की पहली सोमवारी पर सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी.

देवपहाड़ी शिव मठ की विशेषता

देवपहाड़ी शिवमठ एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है, जो लोगों को शांति और आध्यात्मिक ज्ञान देता है. शिक्षा का केंद्र मठ में संचालित गुरुकुलम बच्चों को वेद और अन्य आवश्यक शिक्षा दी जाती है, जिससे बच्चे अपने जीवन में आगे बढ़ सकें. मठ में बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी शिक्षा प्राप्त कर सकें. वेद शिक्षा मठ में वेद की शिक्षा विशेष रूप से दी जाती है, जिससे बच्चे वेदों के ज्ञान से परिचित हो सकें. इसके अलावा बच्चों को सामान्य ज्ञान, गणित, विज्ञान आदि की शिक्षा दी जा रही. बच्चों के लिए जल्द ही कंप्यूटर क्लास शुरू किया जाएगा. ममठाधीश गौरवानंद महाराज ने बताया के भगवान भोलेनाथ के भक्त व क्षेत्रवासियों के सहयोग से गुरुकल का संचालन किया जा रहा है. गुरुकुल का संचालन भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है. सरकार से बिजली, पानी, भवन आदि सहयोग की जरूरत है.

मंदिर में बनी 13वीं सदी की कलाकृतियां

देवपहाड़ी शिव मठ का निर्माण कब हुआ व कैसे हुआ, यह कोई नही जनता है. लोगों का कहना है, यह मठ स्वंयभू है. मठ में बने मंदिर कीकलाकृतियां 13वीं सदी की है. इससे अनुमान लगाया जाता है कि 13वीं सदी में हीं इस मठ की स्थापना यहां पर हुई थी. मठ में भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती, भगवान विष्णु, काल भैरव, अष्टभुजी मां काली की मंदिर है. मंदिर के गर्भगृह में भगवन भोलेनाथ के शिवलिंग के अलावा पार्वती, भगवान विष्णु के चरणपादुका, संख चक्र आदि के निशान बने हुए हैं, जो की आसानी से देखा जा सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
PRADEEP KUMAR

लेखक के बारे में

By PRADEEP KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola