तालाबों की बंदोबस्ती नहीं होने से सरकार को हो रही राजस्व की क्षति

Updated at : 03 Jul 2020 5:31 AM (IST)
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तालाबों की बंदोबस्ती नहीं होने से सरकार को हो रही राजस्व की क्षति

Close up of Poor elderly Indian/Asian woman counting fifty and hundred paper Indian money rupees over her empty vegetable basket.

जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित 438 तालाबों की बंदोबस्ती नहीं हो पा रही है. तालाब का जीर्णोद्धार नहीं होने के कारण मत्स्य जीवी सहयोग समितियां तालाब लेने के प्रति इच्छुक नहीं हैं.

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प्रमोद अंबष्ट, गिरिडीह : जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित 438 तालाबों की बंदोबस्ती नहीं हो पा रही है. तालाब का जीर्णोद्धार नहीं होने के कारण मत्स्य जीवी सहयोग समितियां तालाब लेने के प्रति इच्छुक नहीं हैं. क्योंकि इन तालाबों में बरसात का पानी नहीं ठहराता है. इसके कारण मछली पालन में समितियों को परेशानी होती है. हालांकि तालाब की बंदोबस्ती खुले डाक के माध्यम से की जानी है. अधिकतम बोली लगाने वाले मत्स्य जीवी सहयोग समितियों के नाम से ही तालाब की बंदोबस्ती होती है.

कुछ तालाबों को लघु सिंचाई विभाग और कुछ को विधायक कोटा से जीर्णोद्धार कराया जाता है. पिछले वर्ष लघु सिंचाई विभाग ने 20 तालाबों का जीर्णोद्धार किया था. तालाब की बंदोबस्ती नहीं हो पाने के कारण सरकार को प्रति वर्ष 8 से 10 लाख के राजस्व की क्षति हो रही है. वहीं, दूसरी तरफ समितियों को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है. तालाब की बंदोबस्ती नहीं होने से इसमें मत्स्य पालन नहीं हो रहा है. समिति सदस्यों को आजीविका चलाने में परेशानी हो रही है.

विभाग ने शुरू की कवायद : विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले के बेंगाबाद प्रखंड में 54, सरिया में 22, बगोदर में 26, बिरनी में 15, धनवार में 55, गिरिडीह में 48, गावां में 35, तिसरी में 20, देवरी में 45, गांडेय में 42, डुमरी में 40, बिरनी में 20 तथा पीरटांड़ प्रखंड में 76 छोटे-छोटे ऐसे तालाब हैं जिनकी बंदोबस्ती के लिए विभागीय कवायद शुरू की है.

पूर्व में हो चुकी है 150 तालाब की बंदोबस्ती : जिले में अवस्थित बड़े-बड़े तालाबों में पानी का ठहराव सालों भर रहता है. ऐसे 150 तालाबों की बंदोबस्ती पूर्व में हो चुकी है. यह बंदोबस्ती प्रक्रिया प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल पर होती है. इसमें मत्स्य जीवी सहयोग समितियां ही भाग लेती है. खुले डाक के माध्यम से बंदोबस्ती होने के बाद समितियों सदस्यों को रांची में पांच दिन का प्रशिक्षण दिया जाता है. अभी तक इस वित्तीय वर्ष में मछली जीरा का वितरण नहीं हो सका है. बंदोबस्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद समितियों को जीरा उपलब्ध कराया जायेगा.

14 जुलाई से शुरू होगी प्रक्रिया : उषा किरण : जिला मत्स्य पदाधिकारी सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी उषा किरण का कहना है कि मछली पालन से समिति के सदस्य आत्मनिर्भर बन सकते हैं. मछली पालन में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं. स्थानीय स्तर पर बाजार भी उपलब्ध है. जिले में मछली का डिमांड भी है. ऐसे में जरूरी है कि लोग मछली पालन व्यवसाय से जुड़ें और अपनी आमदनी को बढ़ाएं. उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में 14 जुलाई से बंदोबस्ती प्रक्रिया शुरू होगी. प्रत्येक 15-15 दिन के अंतराल पर बंदोबस्ती होगी. तीन चरणों में 438 तालाबों की बंदोबस्ती किये जाने की योजना है. उन्होंने समितियों से बंदोबस्ती प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की है.

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