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शहादत दिवस : जब अकेले गांव की सड़क पर बैठ गये थे महेंद्र सिंह, पुलिस प्रशासन आ गया था बैकफुट पर

Updated at : 16 Jan 2025 7:04 AM (IST)
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सभा को संबोधित करते महेंद्र सिंह, फाइल फोटो

सभा को संबोधित करते महेंद्र सिंह, फाइल फोटो

Mahendra Singh Martyrs day : महेंद्र सिंह का आज शहादत दिवस है. आज ही के दिन अपराधियों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस वजह से आज उनके व्यक्तित्व को आपको बताने जा रहे हैं.

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राकेश वर्मा, बोकारो (बेरमो): जननेता कॉमरेड महेंद्र सिंह आज भी झारखंड के साथ-साथ कोयलांचल के लोगों के दिलों पर राज करते है. वे एक ऐसे जननेता थे जिन्होंने कभी भी जनविरोधी ताकतों सामने झुके नहीं. कभी अपने सिद्धातों से कोई समझौता नही किया. पूरा जीवन जनसंघर्षों की अगुवाई करते रहे. उनके नेतृत्व की क्षमता उस समय देखने को मिली थी जब वर्ष 1989 में बरकाकाना के पास घुटुआ गांव में आबकारी विभाग की छापेमारी के दौरान एक गोलीकांड हुआ था. इस घटना के बाद डरे सहमे ग्रामीण अपने-अपने घरों में ताला लगाकर चले गये थे. पूरा गांव खाली हो गया था. ऐसे में महेंद्र सिंह अकेले घुटुआ गांव पहुंचे. वहां पर पसरे सन्नाटे को देखकर वे समझ चुके थे कि गांव के लोग डरकर भाग चुके हैं.

गांव के बाहर अकेले सड़क पर बैठ गये थे महेंद्र सिंह

सड़क पर पुलिस की गतिविधि तेज थी. माले कार्यकर्ताओं और समर्थकों को तलाश करना कठिन था. ऐसे में महेंद्र सिंह ने बाजार से लाल रंग का कपड़ा खरीदा, रंग और ब्रश लिया और आईपीएफ जिंदाबाद, घुटुआ गोलीकांड के दोषियों को बर्खास्त करो…, जैसे नारे लिखकर गांव के बाहर अकेले सड़क पर अकेले बैठ गये. उनके धरना पर बैठते ही सशस्त्र पुलिस की गाड़ी रूकी. इसके बाद एक अधिकारी ने उनसे पूछा- कौन हो जी, यहां कैसे बैठ गये? फिर सिपाहियों को आदेश दिया गया कि इनका झंडा और बैनर फेंक दो.

महेंद्र सिंह ने दिया ये जवाब

महेंद्र सिंह ने बड़े ही शांत भाव से कहा कि अगर आपका संविधान इस बात की अनुमति देता है कि शांतिपूर्ण धरना पर बैठे व्यक्ति का झंडा, बैनकर फेंक देना चाहिए, तो फेंक दीजिये. अधिकारी थोड़ा सहमा, फिर बोला- अच्छा ठीक है बैठे रहो, लेकिन हल्ला गुल्ला मत करना. गाड़ी आगे चली गयी. इस बीच ग्रामीणों को खबर मिली कि महेंद्र सिंह गांव के बाहर धरना पर बैठे हैं तो वे धीरे-धीरे अपने घरों की ओर वापस लौटने लगे. हजारीबाग जिले की अन्य इकाइयों को पता चला तो वे लोग भी एकत्र होने लगे. इसके बाद जन आंदोलन का ऐसा ज्वार फूटा कि पुलिस प्रशासन को बैकफुट पर आना पडा. गोलीकांड के दोषी को सजा मिली. जनता का उत्साह बढ़ा और संगठन का विस्तार हुआ. ऐसा साहसी जन नेता बहुत मुश्किल से मिलता है.

सबके सामने कहा- मैं हूं महेंद्र सिंह

अपनी शहादत के समय भी महेंद्र सिंह चाहते तो बचकर निकल सकते थे. लेकिन आम जनता शूटरों का शिकार न बने इसलिए उन्होंने उन्होंने सबके सामने कहा कि मैं हूं महेंद्र सिंह. इसके बाद उन्हें गोली मार दी गयी. आज महेंद्र सिंह की हत्या हुए लगभग 20 वर्ष बीतने को है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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