Giridih News :मनुष्य जन्म केवल भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि मोक्ष व आत्मशांति के लिए मिला है : प्रमाण सागर

Giridih News :शास्वत तीर्थ राज श्री सम्मेद शिखर पर पांच दिवसीय भव्य जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव की शुरुआत शुक्रवार को हुई. गुणायतन परिसर में आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन में देशभर से जैन समाज के हजारों श्रद्धालु, संत-महात्मा व गणमान्य हैं.
आयोजन के दूसरे दिन शनिवार की सुबह छह बजे मांगलिक क्रियाओं के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी. इसके बाद अभिषेक एवं शांतिधारा तथा प्रातः 7:30 से 8:30 बजे तक मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का प्रवचन होगा. आहारचर्या और सुबह 9:30 बजे से दीक्षार्थियों की भव्य शोभायात्रा मुख्य मार्ग से होते हुए गुणायतन गोशाला स्थित प्रांगण में पहुंचेगी, जहां दीक्षा समारोह होगा. प्रातःकालीन धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने मानव जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जीवन मोक्ष प्राप्ति का दुर्लभ नौका है, जिसका सदुपयोग करना अत्यंत आवश्यक है. कहा कि संसार एक अथाह समुद्र के समान है, जिसमें जन्म-मरण और सुख-दुख की तरंगें निरंतर उठती रहती हैं. मनुष्य जीवन ही इस भवसागर से पार उतरने का एकमात्र साधन है.
समय लौटकर नहीं आता है, इसलिए इसका सदुपयोग करें
श्रद्धालुओं को आत्म जागरण का संदेश देते हुए कहा कि समय अत्यंत मूल्यवान है और जो क्षण बीत जाता है, वह पुनः लौटकर नहीं आता. ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के हर क्षण का सदुपयोग करते हुए आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए. मनुष्य जन्म केवल भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि मोक्ष और आत्मशांति की प्राप्ति के लिए मिला है. मोह और आसक्ति के कारण व्यक्ति सत्य से दूर रहता है, किंतु वैराग्य जागृत होने पर जीवन का वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट हो जाता है. इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर महाराज, आचार्य ज्ञेय सागर महाराज सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे. कार्यक्रम में झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओंपहुंचे हैं.
दीक्षार्थियों का परिचय
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि इस दीक्षा समारोह में क्षुल्लक श्री समादर सागर जी, ब्रह्मचारी सारांश जी एवं ब्रह्मचारी रूपेश जी दीक्षा ग्रहण करेंगे. समादरसागर जी का जन्म दो जनवरी 1974 को खातेगांव में हुआ. उन्होंने वर्ष 2018 में गृहत्याग कर 2022 में आचार्य विद्यासागर जी महाराज से क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण कर संयम जीवन प्रारंभ किया. ब्रह्मचारी सारांश जी का जन्म वर्ष 1999 में सांगानेर (जयपुर) में हुआ. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक शिक्षा प्राप्त की तथा वर्ष 2013 में ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर 2020 से वैराग्य मार्ग पर अग्रसर हैं. ब्रह्मचारी रूपेश जी का जन्म वर्ष 1996 में मध्यप्रदेश के काछी पिपरिया में हुआ. बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के धनी रहे रूपेश जी ने वैराग्य भावना जागृत होने पर संयम मार्ग अपनाने का संकल्प लिया.
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