सहरसा में कोसी क्षेत्र का प्रमुख शिवधाम बना बाबा वाणेश्वर मंदिर, जहां जलाभिषेक से पूरी होती हैं मनोकामनाएं
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 08 Jun 2026 9:08 AM
बाबा वाणेश्वर मंदिर,
Aaj ka Darshan: कहते हैं यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना खाली नहीं जाती. सहरसा के देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. श्रावण मास और महाशिवरात्रि के दौरान यह स्थान आस्था के विशाल केंद्र में बदल जाता है.
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की विशेष रिपोर्ट
Aaj ka Darshan: कहरा प्रखंड के देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर कोसी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि बिहार के कई जिलों के श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. यह मंदिर श्रद्धा, शिवभक्ति और आध्यात्मिक शांति का ऐसा संगम माना जाता है जहां पहुंचकर भक्तों को मानसिक सुकून और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार बाबा वाणेश्वर के शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यही कारण है कि पूरे वर्ष यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है.
श्रावण मास में बदल जाता है भक्ति का स्वरूप
श्रावण मास में बाबा वाणेश्वर मंदिर का वातावरण पूरी तरह शिवभक्ति में रंग जाता है. दूर-दराज से कांवरिए यहां जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का लगातार आयोजन होता है.
भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में विशेष व्यवस्थाएं भी की जाती हैं. साफ-सफाई और सुविधाओं पर हाल के वर्षों में विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके.
महाशिवरात्रि में दिखता है भव्य और दिव्य दृश्य
महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा वाणेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. सुबह की आरती से लेकर रात तक पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहता है.
इस अवसर पर बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाता है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होती है. शाम की आरती और भजन-कीर्तन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर इस दिव्य वातावरण का हिस्सा बनते हैं.
धार्मिक पर्यटन का उभरता केंद्र
देवना स्थित यह मंदिर अब धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण स्थान बनता जा रहा है. श्रद्धालु यहां पूजा के साथ-साथ प्राचीन परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करने के लिए भी पहुंचते हैं.
स्थानीय लोगों का मानना है कि बाबा वाणेश्वर की कृपा से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. यही कारण है कि यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी बन चुका है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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