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बिरनी के हाइवा चालक की बेंगलुरु में मौत

Updated at : 16 May 2024 1:09 AM (IST)
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बिरनी के हाइवा चालक की बेंगलुरु में मौत

बिरनी प्रखंड के चिताखारो के 23 वर्षीय हाइवा चालक सुनील मंडल पिता स्व. खोढा मंडल की मौत 13 मई की दोपहर कर्नाटक के देवनहिल जिला के विश्वनाथ बुधनखरी टेलगिरी में पत्थर खदान में गिरने से हो गयी.

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बिरनी. बिरनी प्रखंड के चिताखारो के 23 वर्षीय हाइवा चालक सुनील मंडल पिता स्व. खोढा मंडल की मौत 13 मई की दोपहर कर्नाटक के देवनहिल जिला के विश्वनाथ बुधनखरी टेलगिरी में पत्थर खदान में गिरने से हो गयी. पोस्टमार्टम व कानूनी प्रक्रिया के बाद शव बुधवार की सुबह आठक चिताखारो एंबुलेंस से पहुंचा. मृतक युवक के घर पर एंबुलेंस पहुंचते ही परिजन दहाड़ कर रोने लगे. शव को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ लग गयी. इसके बाद पूरा महौल गमगीन हो गया. मां सीतिया देवी मृतक पुत्र के शव से लिपट कर रो-रोकर बेहोश हो रही थी. मृतक के बड़े भाई गणेश मंडल व उनकी पत्नी भी होश खो रहे थे. ग्रामीणों के सहयोग से शव को बुधवार की दोपहर में अंतिम संस्कार कर दिया गया. घटना के बारे में मृतक के मौसेरे भाई बलगो के लालचंद मंडल ने बताया कि सुनील जनवरी में घर से काम करने बेंगलुरु साथ में आया था. सुनील हाइवा चालक था. दोनों भाई बेंगलुरू में स्टोन बालाजी क्रशर में हाइवा चलाते थे. वह कंपनी में पांच माह से काम कर रहे थे. 13 मई दोपहर करीब 12 बजे को सुनील हाइवा लेकर क्रशर से तीन किलोमीटर दूरी वेणु माइंस पत्थर लेने गया था. माइंस के ऊपर हाइवा में पत्थर लोड करा रहा था. इसी दौरान सुनील का अचानक पैर फिसला और वह पत्थर माइंस में गिर गया. लोगों ने सुनील को निकालकर बेहोशी हालत में हॉस्पिटल पहुंचाया. चिकित्सक ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. थाना में कानूनी प्रक्रिया व पोस्टमार्टम होने के बाद कंपनी ने शव को पैतृक गांव भेज दिया. उन्होंने कहा कि स्टोन बालाजी के मालिक रवि कुमार गौड़ा ने अंतिम संस्कार के लिए कुछ सहयोग राशि दी. कंपनी के मालिक ने सुनील की मां को सहयोग राशि के लिए बेंगलुरु बुलाया है.

परिजन का रो-रोकर हुआ बुरा हाल

मृतक सुनील की मां सीतिया देवी रो-रोकर कह रही थी कि दो पुत्र हैं. दोनों पुत्र के सिर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया था. बड़ा पुत्र गणेश मंडल जब तीन साल व छोटा पुत्र सुनील मंडल करीब एक साल का था, उसी समय पति का निधन हो गया. दोनों पुत्र को दिहाड़ी मजदूरी कर पाला. दोनों पुत्र कमाने लायक हुए तो पांच माह पूर्व बाहर चले गये. पांच माह के अंदर छोटा पुत्र का शव घर पहुंचा. मृतक के बड़े भाई दिव्यांग गणेश मंडल केरल में मजदूरी कर रहा था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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