Giridih News :मरांग बुरु बोंगा बुरु समिति का बाहा पर्व कल से

Updated at : 28 Feb 2025 11:32 PM (IST)
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Giridih News :मरांग बुरु बोंगा बुरु समिति का बाहा पर्व कल से

Giridih News :मरांग बुरु बोंगा बुरु का बाहा पर्व दो व तीन मार्च को पारसनाथ की तलहटी में दिशोम मांझी थान में मनाया जायेगा. दो मार्च की रात ही मांझी थान से लोग जुग जाहेर थान के लिए निकलेंगे. बाहा पर्व के मौके पर झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों से भी आदिवासी समुदाय के लोग यहां आते हैं.

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जुग जाहेर थान के लिए पारसनाथ पर्वत की तलहटी में बने मांझी थान से होंगे लोग रवाना

मरांग बुरु बोंगा बुरु का बाहा पर्व दो व तीन मार्च को पारसनाथ की तलहटी में दिशोम मांझी थान में मनाया जायेगा. दो मार्च की रात ही मांझी थान से लोग जुग जाहेर थान के लिए निकलेंगे. बाहा पर्व के मौके पर झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों से भी आदिवासी समुदाय के लोग यहां आते हैं. जुग जाहेर थान में पूजा अर्चना के बाद सभी वापस मांझी थान लौटेंगे. तीन मार्च को दिशोम मांझी थान में आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा अर्चना की जायेगी. इस दौरान लोग मांझी थान में आशीर्वाद लेंगे. मांझी थान में आदिवासी समुदाय के अलग-अलग जिलों के लोग स्टॉल लगायेंगे.

प्रकृति पर्व है बाहा

परंपरा के अनुसार मनाया जाता है पर्व

बाहा पर्व आदिवासियों के लिए प्रकृति का पर्व माना जाता है. लोक परंपरा के अनुसार आदिवासी समुदाय के लोग मरांग बुरु को देवता के रूप में पूजते हैं. पतझड़ के बाद पेंड़ों में नयी पत्तियों की हरियाली से आदिवासी झूम उठते हैं. पूजा कर आदिवासी समुदाय पर्वत व जंगलों की हरियाली का स्वागत करते हैं. बाहा पर्व यानि प्रकृति की पूजा के अवसर पर मरांग बुरु पारसनाथ में जुग जाहेर थान तथा मंझी थान में धर्म गुरु के निर्देश पर पूजा की जाती है. हजारों की संख्या में क्षेत्र के आदिवासी ढोल मांदर की थाप पर मरांग बुरु पहाड़ स्थित जुग जाहेर थान जाते हैं. पूजा अर्चना के बाद मांझी थान में धर्मसभा तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम होता है. सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए पंडाल का निर्माण अंतिम चरण में है.

मुख्यमंत्री के आने की चर्चा:

बताया जा रहा है कि बाहा पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहुंचेंगे. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी ने नहीं हुई है.

पारंपरिक वस्त्रों की लगती हैं दुकानें

यूं तो बाहा पर्व में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वस्त्र के साथ ही भाग लेते हैं. इसके बाद भी यहां कपड़ों का स्टॉल भी लगता है. काफी संख्या में लोग कपड़ा खरीदना पसंद करते हैं. कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के रामलाल मुर्मू, सिकंदर हेंब्रम, महावीर मुर्मू, अर्जुन हेंब्रम, बाबूराम सोरेन, बुधन हेंब्रम, फागू मरांडी, सोमरा हेंब्रम, सुरेश हेंब्रम, राजेश किस्कू, दिलीप मुर्मू, सुशांत सोरेन, बजल हेंब्रम, नायके चांदोलाल टुडू आदि सक्रिय हैं.

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