सदर अस्पताल में कर्मचारियों का टोटा

Updated at :16 May 2017 8:10 AM
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सदर अस्पताल में कर्मचारियों का टोटा

समस्या. कर्मचारियों की कमी से प्रभावित हो रहा जिले का स्वास्थ्य तंत्र सिर्फ चिकित्सक के भरोसे अस्पताल नहीं चलाया जा सकता, पर गिरिडीह के सदर अस्पताल में यह कोशिश हो रही है. जिला के स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ सदर अस्पताल इन दिनों कर्मियों की भयंकर कमी से जूझ रहा हैै. कर्मियों की कमी की भरपाई […]

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समस्या. कर्मचारियों की कमी से प्रभावित हो रहा जिले का स्वास्थ्य तंत्र
सिर्फ चिकित्सक के भरोसे अस्पताल नहीं चलाया जा सकता, पर गिरिडीह के सदर अस्पताल में यह कोशिश हो रही है. जिला के स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ सदर अस्पताल इन दिनों कर्मियों की भयंकर कमी से जूझ रहा हैै. कर्मियों की कमी की भरपाई आउटसोर्स से करने की कोशिश की जाती है, पर यह अनुभव व कौशल का विकल्प नहीं हो सकती.
गिरिडीह : जिला की लगभग साढ़े 24 लाख की आबादी के स्वास्थ्य के रखवाला गिरिडीह सदर अस्पताल में इन दिनों कर्मचारियों का टोटा है. चिकित्सक तो हैं, पर शेष सहायक कर्मचारियों की कमी को आउटसोर्सिंग में दैनिक मजदूरी पर रखे गये कर्मियों से जैसे-तैसे काम निकाला जा रहा है. तकनीकी जानकारी, अनभव की कमी में इन कर्मियों से इसकी भरपाई नहीं हो पा रही. स्वीकृत इकाई के अनुसार शत-प्रतिशत चिकित्सक की नियुक्ति के बावजूद सदर अस्पताल में कौशल पूर्ण कर्मियों की कमी का असर कामकाज पर दिखता है.
आउटसोर्सिंग से अनुभव की तुलना नहीं : कौशल व अनुभव की कमी : सदर अस्पताल में प्रतिदिन लगभग तीन से चार दर्जन महिलाओं का प्रसव होता है. सड़क हादसे और मारपीट जैसी घटनाओं के सिलसिले में यहां प्रतिदिन मरीजों की भरती होती है. लेकिन कर्मचारियों की कमी से एक ही कर्मचारी को दिन-रात की ड्यूटी लगानी पड़ती है. आउटडोर में प्रतिदिन विभिन्न रोगों के इलाज के लिए बड़ी तादाद में मरीजों की कतार लगी रहती है.
हड्डी रोग को छोड़ अन्य बीमारियों के इलाज के लिए मरीज यहां पहुंचते हैं. अस्पताल में अनुभवी सर्जन भी हैं, जो महानगरों के प्रसिद्ध अस्पतालों में बेहतर सेवा दे चुके हैं. वे लगातार अस्पताल में सेवा दे रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों की कमी के सामने वह भी बेबस हैं.
एक्स-रे ने बचा रखी है विभाग की लाज
सदर अस्पताल में एक भी हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं हैं. फलत: हड्डी रोग से संबंधित मरीजों का इलाज यहां नहीं होता है. हड्डी रोग से प्रभावित मरीज यहां पहुंचते हैं. उनके लिए यहां एक्सरे की व्यवस्था है.
एक्सरे टेक्निशियन एक्सरे कर स्थिति बता देते हैं. लेकिन एक्सरे टेक्नीशियन आगामी 31 मई 2017 को सेवानिवृत्त होंगे. उनकी सेवानिवृत्ति के बाद यहां एक्सरे के भी प्रभावित होने की आशंका जाहिर की जा रही है. चिकित्सक के अभाव में मरीजों को इलाज के लिए पीएमसीएच धनबाद या रिम्स रांची रेफर कर दिया जाता है. दूसरी तरफ अस्पताल में ए ग्रेड नर्स की भी बेहद कमी है. एक ग्रेड नर्स के 16 पद मंजूर हैं, पर कार्यरत हैं सिर्फ छह. नर्सों की इस कमी से गर्भवती महिलाओं का प्रसव प्रभावित हो रहा है. यहां प्रतिदिन प्रसव संबंधी परेशानी की शिकायतें आती रहती हैं. इसका खमियाजा बहाल नर्स को झेलना पड़ता है.
सदर अस्पताल में कर्मचारियों की कमी से सिविल सर्जन को अवगत करा दिया गया है. इसके लिए विभाग की ओर से सरकार को प्रतिवेदन भी भेजा गया है. लगातार स्ट्रेंथ का प्रतिवेदन जा रहा है. एक्सरे टेक्नीशियन सेवानिवृत्त होते हैं तो यहां एक्सरे का कार्य बंद हो जायेगा. कर्मचारी की व्यवस्था नहीं होती है तो बाहर बोर्ड लटका दिया जायेगा.
डाॅ बीएन झा, अस्पताल उपाधीक्षक.
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