गिरिडीह के मेयर की कुर्सी खतरे में

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Aug 2019 3:15 AM

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अंचलाधिकारी ने सुनील पासवान के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को किया रद्द नगर निगम चुनाव के दौरान जांच में संदिग्ध पाया गया था प्रमाण पत्र गिरिडीह :गिरिडीह के मेयर सुनील पासवान की कुर्सी खतरे में है. गिरिडीह के अंचलाधिकारी ने आदिवासी कल्याण आयुक्त, झारखंड के निर्देश के आलोक में मेयर श्री पासवान के अनुसूचित जाति […]

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अंचलाधिकारी ने सुनील पासवान के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को किया रद्द

नगर निगम चुनाव के दौरान जांच में संदिग्ध पाया गया था प्रमाण पत्र
गिरिडीह :गिरिडीह के मेयर सुनील पासवान की कुर्सी खतरे में है. गिरिडीह के अंचलाधिकारी ने आदिवासी कल्याण आयुक्त, झारखंड के निर्देश के आलोक में मेयर श्री पासवान के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया है. बता दें कि अप्रैल 2018 में गिरिडीह नगर निगम का चुनाव हुआ था.
मेयर के पद को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था. इसमें मेयर पद के लिए 13 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र भरा था. जांच के बाद छह प्रत्याशियों का जाति प्रमाण पत्र संदिग्ध पाया गया था. गिरिडीह की तत्कालीन एसडीओ विजया जाधव ने जाति प्रमाण पत्र के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी.
इस कमेटी ने भाजपा के प्रत्याशी सुनील कुमार पासवान, झाविमो प्रत्याशी संजय दास, कांग्रेस प्रत्याशी समीर राज चौधरी, निर्दलीय प्रत्याशी रंजन कुमार रविदास, मनोज पासवान और प्रदीप पासवान का जाति प्रमाण पत्र संदिग्ध पाया था. जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि मेयर पद के प्रत्याशी सुनील कुमार पासवान ने सर्विस बुक और जमीनी दस्तावेज के आधार पर जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए दावा किया था, लेकिन जांच कमेटी ने कहा था कि इन्होंने 1950 से स्थायी निवासी होने का कोई प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया है.
जांच कमेटी की अनुशंसा के बाद गिरिडीह की तत्कालीन अंचलाधिकारी प्रशिक्षु आइएएस मेघा भारद्वाज ने छह प्रत्याशियों के जाति प्रमाण पत्र में गड़बड़ी का हवाला दिया और कहा कि प्रमाण पत्र में वर्णित जाति सत्य है. लेकिन, झारखंड सरकार के कार्मिक व प्रशासनिक सुधार राजभाषा विभाग के पत्रांक (14/जानि-03-13-2016 व 6763 दिनांक 05.08.2016 के कंडिका दो एवं कंडिका तीन) के अनुसार सुनील कुमार पासवान, समीर राज चौधरी, रंजन कुमार रविदास, मनोज कुमार पासवान और प्रदीप पासवान के नाम से निर्गत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर झारखंड राज्य में आरक्षण की सुविधा अनुमान्य नहीं है.
बताया जाता है कि यह जांच रिपोर्ट मिलने के बाद एसडीओ विजय जाधव ने अग्रेतर कार्रवाई के लिए आदिवासी कल्याण आयुक्त झारखंड को पत्र लिखा था. इसके बाद मामले की छानबीन की गयी. जाति छानबीन समिति के समक्ष मेयर श्री पासवान ऐसा कोई भी दस्तावेज नहीं दे पाये जो कि यह साबित करे कि वे 26 जनवरी 1950 के पूर्व से झारखंड के निवासी हैं.
ऐसे में श्री पासवान का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र रद्द कर देने का निर्देश जारी कर दिया गया. बताया जाता है कि जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के साथ ही उनकी मेयर की कुर्सी खतरे में पड़ गयी है. इधर, गिरिडीह के नगर आयुक्त गणेश कुमार ने बताया कि अब तक उन्हें आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं मिली है. पत्र मिलने के बाद नगर विकास विभाग को आवश्यक दिशा निर्देश के लिए भेजा जायेगा और जैसा निर्देश विभाग से प्राप्त होगा, वह कदम उठायेंगे.
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