हार्डकोर नक्सली सूरज ने किया सरेंडर

Updated at : 19 Aug 2018 5:03 AM (IST)
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हार्डकोर नक्सली सूरज ने किया सरेंडर

न्यू पुलिस लाइन में आयोजित नयी दिशा कार्यक्रम में किया आत्मसमर्पण डीसी-एसपी की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम 2016 से कुख्यात नक्सली अजय के दस्ते से जुड़ा था सूरज गिरिडीह : नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के हार्डकोर नक्सली बाबुजन मरांडी उर्फ सूरज ने शनिवार को गिरिडीह प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. न्यू पुलिस लाइन पपरवाटांड़ […]

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न्यू पुलिस लाइन में आयोजित नयी दिशा कार्यक्रम में किया आत्मसमर्पण

डीसी-एसपी की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम
2016 से कुख्यात नक्सली अजय के दस्ते से जुड़ा था सूरज
गिरिडीह : नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के हार्डकोर नक्सली बाबुजन मरांडी उर्फ सूरज ने शनिवार को गिरिडीह प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. न्यू पुलिस लाइन पपरवाटांड़ में आयोजित नयी दिशा (आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति) कार्यक्रम के दौरान नक्सली सूरज पहुंचा, जिसे पुष्प गुच्छ, फूल माला व शॉल देकर डीसी मनोज कुमार, एसपी सुरेंद्र कुमार झा, सीआरपीएफ 7वीं बटालियन के कमांडेंट अनिल कुमार भारद्वाज व एएसपी दीपक कुमार ने सम्मानित किया.
हार्डकोर नक्सली
इस दौरान डीसी-एसपी के हाथों नक्सली सूरज को 50 हजार रुपये दिये गये. एसपी ने बताया कि सूरज भाकपा माओवादी नक्सली अजय महतो के दस्ते का खास मेंबर है.
ढोलकट्टा मुठभेड़ में सूरज को लगी थी गोली : एसएलआर चलाने में महारत यह नक्सली नौ जून 2017 को ढोलकट्टा में कोबरा व गिरिडीह पुलिस के साथ हुए नक्सलियों की मुठभेड़ में भी शामिल रहा था. इस दौरान उसके चेहरे पर गोली भी लगी थी, जिसका इलाज इसने करवाया था. 31 जनवरी 2018 को मधुबन में सीआरपीएफ के साथ मुठभेड़ में भी यह शामिल था. निमियाघाट थाना इलाके बंदखारो निवासी सोमरा मरांडी का पुत्र सूरज दो वर्षों से नक्सली संगठन का काम कर रहा था. हाल के दिनों में नक्सली संगठन से इसका मोह भंग हुआ और झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति से यह प्रभावित होकर सरेंडर करने का फैसला लिया.
एसएलआर चलाने में महारत हासिल है सूरज को
एसपी ने बताया कि नक्सली सूरज वर्ष 2016 से कुख्यात नक्सली अजय के दस्ते से जुड़ा हुआ है. चंद महीनों में अजय का खासमखास बन चुका यह नक्सली एसएलआर रायफल चलाने में महारत है. पुलिस के साथ हुई दोनों मुठभेड़ में इसने एसएलआर से ही फायरिंग की थी. एसपी ने बताया कि भटके हुए लोगों के लिए झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति एक बेहतर विकल्प है.
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