ट्रांसपोर्टिंग के क्षेत्र में हो क्रांतिकारी बदलाव : मित्तल

Updated at : 19 Jul 2018 6:47 AM (IST)
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ट्रांसपोर्टिंग के क्षेत्र में हो क्रांतिकारी बदलाव : मित्तल

धनबाद : केंद्र सरकार की ओर से भारी वाहनों सहित ट्रकों की माल ढुलाई क्षमता को 25% तक बढ़ाये जाने का धनबाद जिले के व्यवसायी समाज ने स्वागत किया है. धनबाद के जानेमाने हार्डकोक व्यवसायी और झारखंड इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड एसोसिएशन (जीटा) के अध्यक्ष केदारनाथ मित्तल ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के […]

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धनबाद : केंद्र सरकार की ओर से भारी वाहनों सहित ट्रकों की माल ढुलाई क्षमता को 25% तक बढ़ाये जाने का धनबाद जिले के व्यवसायी समाज ने स्वागत किया है. धनबाद के जानेमाने हार्डकोक व्यवसायी और झारखंड इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड एसोसिएशन (जीटा) के अध्यक्ष केदारनाथ मित्तल ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त किया है.
श्री मित्तल ने कहा है कि इससे देश के सरफेस ट्रांसपोर्ट (भू-परिवहन) के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आयेगा. साथ ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा. यहां बता दें कि यह मामला सबसे पहले श्री मित्तल ने ही उठाया था. श्री मित्तल ने देश की मौजूदा सरफेस ट्रांसपोर्ट सिस्टम (भू-परिवहन व्यवस्था), टोल टैक्स वसूली प्रावधान एवं तरीके इत्यादि के औचित्य पर गंभीर एवं विचारणीय सवाल उठाते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा था.
पत्र में श्री मित्तल ने भू-परिवहन की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर अपने सुझावों से अवगत कराया था. श्री मित्तल के पत्र पर श्री गडकरी ने इस दिशा में गंभीरता से विचार कर उचित कार्यवाही का आश्वासन भी दिया था.
ये थी परेशानी: पत्र में श्री मित्तल ने कहा था कि विभिन्न राज्यों-स्थानों पर उत्पादित मालों, खद्यान्नों, खनिजों की देश के कोने-कोने तक ढुलाई का 80 फीसदी काम सरफेस ट्रांसपोर्ट पर निर्भर है. जिस तरह सामानों-खद्यान्नों-खनिजों का उत्पादन देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एवं अर्थव्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभाता है, ठीक उसी तरह सही समय और सही गंतव्य तक इन जिंसों की आपूर्ति एवं उनका वितरण भी काफी महत्व रखता है.
सरकारी आकड़ों के मुताबिक देश भर में माल ढुलाई का सर्वाधिक सुलभ एवं द्रुत संसाधन हैवी लोडेड ट्रक ही हैं. सरफेस ट्रांसपोर्टिंग के जरिये लगभग 80 प्रतिश्त माल की ढुलाई होती है, जबकि रेलवे के जरिये महज 20 फीसदी. लेकिन दुर्भाग्य से देश के विभिन्न राज्यों में सरफेस ट्रांसपोर्ट के आधुनिकीकरण के प्रति राज्य व केंद्र सरकारें उदासीन रही हैं. विभिन्न स्थानों पर टोल टैक्स वसूली की प्रक्रिया बेहद उबाऊ एवं खर्चीली है. विशेषकर ट्रकों के लिए प्रावधानित ओवर लोड, अंडर लोड के कायदे कानून भी अत्यंत जटिल एवं व्ययकारक हैं. ऐसे सरकारी कायदे-कानूनों से रिश्वतखोरी को बढ़ावा मिलता है, जिसकी भरपाई व्यवसायी वर्ग को जिंसों की कीमत बढ़ा कर करनी पड़ती है.
ये दिये थे सुझाव : श्री मित्तल ने भार सीमा 15 एमटी से बढ़ा कर 25 /30 एमटी करने का सुझाव दिया था. उनका तर्क था कि यह संभव भी है, क्योंकि वर्तमान में सड़कों की लोड बियरिंग क्षमता बढ़ायी गयी है. श्री मित्तल का सुझाव था कि भारी वाहनों की निर्माता कंपनियों को कम ईंधन खपतवाले एवं ईको फ्रेंडली वाहनों के निर्माण का निर्देश दिया जाये.
मोटर वाहन अधिनियम, टोल टैक्स वसूली कानून, चेक पोस्ट पर लागू कानून आदि में मौजूदा परिस्थिति के अनुरूप संशोधन किये जाये. टोल टैक्स सेंटर्स चेक पोस्ट आदि पर समुचित निगरानी प्रबंधन के जरिये अवैध वसूली पर रोक लगायी जाये. सड़कों के विस्तारीकरण के कार्य में तेजी लायी जाये.
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