रेफर बना मरीजों-परिजनों में दहशत फैलाने का हथियार

Updated at : 16 Jul 2018 7:13 AM (IST)
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रेफर बना मरीजों-परिजनों में दहशत फैलाने का हथियार

गिरिडीह : रेफर करने की धमकी गिरिडीह सदर अस्पताल के डॉक्टरों के लिए बेहतर हथियार साबित हो रहा है. रेफर करने और मरीज व उसके परिजनों को तरह-तरह से टॉर्चर करने के कारण अस्पताल में भर्ती मरीज व उसके परिजन दहशत में रहते हैं. यहां तक कि अस्पताल प्रबंधन की मनमानी को बोलने से भी […]

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गिरिडीह : रेफर करने की धमकी गिरिडीह सदर अस्पताल के डॉक्टरों के लिए बेहतर हथियार साबित हो रहा है. रेफर करने और मरीज व उसके परिजनों को तरह-तरह से टॉर्चर करने के कारण अस्पताल में भर्ती मरीज व उसके परिजन दहशत में रहते हैं. यहां तक कि अस्पताल प्रबंधन की मनमानी को बोलने से भी कतराते हैं. यदि कोई मुखर होकर अस्पताल की व्यवस्था की शिकायत कहीं करता है या इसकी भनक तक अस्पताल कर्मियों को होती है तो वे मरीजों को आनन-फानन में रेफर कर देते हैं.
गत 12 जुलाई को लक्ष्मी देवी को भी सिर्फ इसलिए आनन-फानन में रात में ही रेफर कर दिया गया, क्योंकि अस्पताल प्रबंधन को एहसास हो गया था कि कुछ लोग मामले को तूल देने की कोशिश में हैं. इधर रविवार को प्रभात खबर ने गिरिडीह सदर अस्पताल के प्रसुती व शिशु वार्ड का जायजा लिया तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए. कई वार्ड के बेड पर बेडशीट तक उपलब्ध नहीं थी. जब ड्यूटी पर तैनात नर्स से उनका पक्ष जानना चाहा तो आनन-फानन में मरीजों को बेडशीट उपलब्ध करायी गयी.
नर्स का कहना था कि बेडशीट धुलाई के लिए भेजी गयी थी. बेडशीट नहीं रहने के कारण कई लोगों को बेडशीट नहीं मिली होगी. लेकिन वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को बेडशीट दी जाती है. मरीजों में अस्पताल कर्मियों के दहशत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई आरोपों के बाबत पूछे गये सवालों पर कई मरीज व उसके परिजन कुछ भी बोलने से कतराते रहे. जब वार्ड में भर्ती जमुआ के कुरहोबिंदो की शिल्पा कुमारी से पूछताछ शुरू की गयी तो उसने बताया कि उन्हें धनबाद रेफर कर देने की धमकी दी गयी थी.
मरीज के परिजनों में ऐसी दहशत था कि उसके पति ने भी कुछ भी बताने से इनकार कर दिया. लेकिन गौरतलब बात यह है कि अस्पताल कर्मियों की मनमानी का पराकाष्ठा इतनी है कि दहशत के बाद भी कुछ लोग अपने आपको रोक नहीं पाये और पैसा वसूलने से लेकर उनकी मनमानी करने तक का कई मामला उजाकर कर दिया.
मरीजों से वसूली जाती है रकम
भंडारीडीह की रूबी प्रवीण को शनिवार को भर्ती कराया गया. भर्ती के साथ ही उसे तरह-तरह से डराया गया. रूबी प्रवीण की भाभी रूमी प्रवीण कहती है कि वह जब भर्ती कराने आयी थी तो उन्हें बताया गया कि रूबी काफी सीरियस है, उसे रेफर करना पड़ेगा. कुछ देर बाद ही फिर सहिया का कहना था कि नॉर्मल डिलिवरी चाहती है तो दो हजार रुपये लगेंगे. यह रकम डॉक्टर लेंगी. दो हजार रुपये देने के बाद इलाज शुरू किया गया. कई तरह के जांच के लिए पुर्जी थमायी गयी और इसके लिए भी सात सौ रुपये अलग से वसूले गये.
वार्ड में आने से कतराते हैं डॉक्टर
जब मरीज या उसके परिजनों से कोई आर्थिक लाभ नहीं होता है तो डॉक्टर मरीज की जांच करने में भी दिलचस्पी नहीं रखते. वार्ड में आने से भी डॉक्टर कतराते हैं. इलाजरत ललीता देवी कहती हैं कि बच्चे की डिलिवरी शनिवार को तीन बजे हुआ और शाम छह बजे बच्चे को स्लाइन लगागयी गयी. लेकिन पानी खत्म होने के बाद भी सुबह में आठ बजे तक स्लाइन नहीं खोला गया था. अंतत: उनलोगों के हस्तक्षेप से स्लाइन हटायी गयी. इतना ही नहीं, डॉक्टर वार्ड में आने से कतराते रहे तब बच्चे को वे स्वयं लेकर डॉक्टर के पास दिखाने पहुंचे.
मरीजों से करते हैं अभद्र व्यवहार
जब डॉक्टर पर इलाज के लिए परिजनों की ओर से कहा जाता है तो अस्पताल के कर्मी समेत डॉक्टर तक अभद्र व्यवहार करते हैं. भंडारीडीह की प्रसुता मंजु देवी पति कार्तिक तुरी शनिवार को भर्ती हुई है. वह कहती है कि शनिवार को ग्यारह बजे ही डिलिवरी हुई, लेकिन पिछले 24 घंटे से बच्चा शौच तक नहीं किया है और किसी डॉक्टर ने बच्चे को देखना तक उचित नहीं समझा.
नर्स से कई बार इस संबंध में बात की गयी, लेकिन नर्स ने भी फटकार दिया और अभद्र व्यवहार किया. यदि किसी मामले में डॉक्टर या अस्पताल प्रबंधन को यह महसूस होने लगता है कि मरीज के परिजन बात को तूल दे सकते हैं तो शुरुआती दौर में उन्हें तरह-तरह से धमकियां तो दी ही जाती हैं. अंतत: मरीज को रेफर कर दिया जाता है. इसी रेफर के भय से कई मरीज व उनके परिजन डॉक्टरों व कर्मियों की मनमानी सहने के लिए विवश हैं.
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