गिरिडीह समेत 74 हजार बसावट क्षेत्र दायरे में

Updated at :25 Jul 2017 11:26 AM
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गिरिडीह समेत 74 हजार बसावट क्षेत्र दायरे में

आर्सेनिक व फ्लोराइड युक्त पानी को ले केंद्र ने स्वीकारा नयी दिल्ली : देश में लगभग 74548 बसावट सेहत के लिए खतरनाक माने गये आर्सेनिक व फ्लोराइड युक्त पेयजल के दायरे में हैं. राज्यसभा में केंद्रीय पेयजल व स्वच्छता मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक सवाल के जवाब में इस बात को स्वीकार किया. वैसे […]

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आर्सेनिक व फ्लोराइड युक्त पानी को ले केंद्र ने स्वीकारा

नयी दिल्ली : देश में लगभग 74548 बसावट सेहत के लिए खतरनाक माने गये आर्सेनिक व फ्लोराइड युक्त पेयजल के दायरे में हैं. राज्यसभा में केंद्रीय पेयजल व स्वच्छता मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक सवाल के जवाब में इस बात को स्वीकार किया. वैसे सरकार पेयजल की गुणवत्ता को सुधारने का प्रयास कर रही है.

देश के 17.26 लाख बसावटों को पेयजल सुविधा के दायरे में शामिल किया गया है. हालांकि, पेयजल गुणवत्ता मानकों के लिहाज से सभी बसावटों को दूषित पेयजल संकट से मुक्त करना अभी बाकी है. उन्होंने कहा कि पेयजल उपलब्धता के मामले में 13 लाख से अधिक बसावट पेयजल की पूर्ण उपलब्धता के दायरे में हैं.

तीन लाख से अधिक बसावट आंशिक उपलब्धता वाली हैं. तोमर ने कहा कि केंद्र ने पेयजल गुणवत्ता सुधार के लिए राष्ट्रीय जल गुणवत्ता मिशन की इस साल मार्च में शुरुआत की है.

20 राज्य फ्लोराइड प्रभावित : एक रिपोर्ट के अनुसार 20 राज्य फ्लोराइड से प्रभावित हैं. इन राज्यों में बिहार सहित आंध्रप्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश महाराष्ट्र, ओड़िशा, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल है.

झारखंड के भी कई जिले प्रभावित : झारखंड के साहिबगंज, गढ़वा, पलामू जिले के कई जल स्रोतों में फ्लोराइड की मात्रा सीमा से अधिक मिली है. गोड्डा, बोकारो, गिरिडीह, पलामू, गुमला, रामगढ़ और रांची जिले में फ्लोराइड की मात्रा अनुमान्य सीमा 1.5 पीपीएम से अधिक है. वहीं, पाकुड़, चतरा, गढ़वा, गुमला, लोहरदगा, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, रांची व साहिबगंज में 45 मिग्रा/ली से ज्यादा नाइट्रेट पायी गयी है.

बिहार के करीब 11 जिले चपेटे में : बिहार के करीब 11 जिलों के भूजल में आर्सेनिक के स्तर में बढ़ोतरी हुई है. सर्वाधिक खराब स्थिति भोजपुर, बक्सर, वैशाली, भागलपुर, समस्तीपुर, खगड़िया, कटिहार, छपरा, मुंगेर व दरभंगा जिलों की है. समस्तीपुर के एक गांव में भूजल के एक नमूने में आर्सेनिक की मात्रा 2100 पीपीबी पायी गयी, जो सर्वाधिक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पेयजल में 10 पीपीबी की मानक मात्रा तय की है.

आर्सेनिक व फलोराइड से बीमारी : आर्सेनिक से लीवर, किडनी के कैंसर और गैंगरीन जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. वहीं, फ्लोराइड की अधिक मात्रा से हड्डी रोग जनित समस्याएं पैदा होती हैं. फ्लोरोसिस से ग्रसित व्यक्ति की रीढ़, गर्दन, पैर या हाथ की हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं. खड़ा होने, चलने या दौड़ने में कठिनाई होती है. दंत फ्लोरोसिस से बच्चों के दांत टूटने लगते हैं. ( स्रोत : इंडिया वाटर पोर्टल)

पेयजल का मानक

40 लीटर प्रति व्यक्ति पेयजल की उपलब्धता वाली बसावट को पूर्ण उपलब्धता और इससे कम उपलब्धता वाली बसावट को आंशिक उपलब्धता की श्रेणी में रखा जाता है.

जनता और पेयजल

22% पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर

15 % को पानी का घरेलू कनेक्शन

53% लोग टैंकर, पाइप लाइनों के सहारे

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