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शिक्षा के साथ-साथ जीवन में संवेदना का होना भी जरूरी : डीस

Updated at : 26 Sep 2024 9:49 PM (IST)
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शिक्षा के साथ-साथ जीवन में संवेदना का होना भी जरूरी : डीस

शिक्षा के साथ-साथ जीवन में संवेदना का होना भी जरूरी : डीसी

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जिले में सामाजिक और भावनात्मक शिक्षण पर आधारित सेल समागम का आयोजन गुरुवार को स्थानीय आरके रामासाहू प्लस टू सीएम एक्सीलेंस विद्यालय में किया गया. समागम में मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त शेखर जमुआर एवं विशिष्ट अतिथि जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज उपस्थित थे. इस अवसर पर छात्रों ने सामाजिक और भावनात्मक शिक्षण से जुड़ी गतिविधियों में अपने अनुभव साझा किये. इसकी सबने सराहना की. कार्यक्रम में उपस्थित उपायुक्त शेखर जमुआर ने सामाजिक और भावनात्मक शिक्षण के महत्व पर बल दिया. उन्होंने कहा कि इस तरह की शिक्षा न केवल बच्चों की शैक्षणिक सफलता बढ़ाती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता को भी सुधारती है. उन्होंने कहा कि सेल समागम का मुख्य उद्देश्य सभी हितधारकों को एक साझा मंच पर लाना है. ताकि सामाजिक और भावनात्मक शिक्षण के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ायी जा सके और बच्चों के संपूर्ण बाल विकास को सुनिश्चित किया जा सके. उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास में योगदान मिलता है. उपायुक्त श्री जमुआर ने बताया कि शिक्षा के साथ-साथ जीवन में संवेदनाएं/भावनाएं अति आवश्यक हैं. इमोशन ही एक ऐसी चीज है, जो इंसानियत को जोड़ने का काम करती है. सोशल इमोशनल लर्निंग आज के शिक्षा में शामिल करना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है. इससे किताबी शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक एवं व्यावहारिक शिक्षा का ज्ञान प्राप्त होता है. इससे लोगों के प्रति शिष्टाचार की भावना जागृत होती है. उन्होंने कहा कि सेल के बिना बड़े से बड़े शैक्षणिक प्रमाण-पत्र महत्वहीन प्रतीत होते हैं. भावनाएं एवं संवेदनशीलता अपने परिवार के सदस्यों के साथ-साथ सामाजिक परिवेश में रहने वाले व्यक्तियों से एक दूसरे को जोड़ने का कार्य करती है. मानवता के लिए इमोशंस का महत्वपूर्ण स्थान है. उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं को अपने अध्ययन में मैकेनिक एजुकेशन (किसी भी तथ्य को रटने) के स्थान पर समझ एवं व्यवहारिकता के साथ शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया. इस अवसर पर जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने भी विचार व्यक्त किये. कार्यक्रम में शिक्षक, छात्र, जिला व प्रखंड स्तर के अधिकारी, अभिभावक, पंचायत प्रतिनिधि व युवा उपस्थित थे.

राज्य के 121 विद्यालयों में चल रहा कार्यक्रम

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि प्रोजेक्ट सम्पूर्णा हर्ष जोहार नाम से यह कार्यक्रम वर्तमान में झारखंड के 24 जिलों के 121 विद्यालयों में क्रियान्वित किया जा रहा है. अगले चरण में इसे 325 प्रखंड स्तरीय आदर्श विद्यालयों में भी लागू किया जायेगा. इसके माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिलेगा. टीम सम्पूर्णा द्वारा किए जा रहे इस महत्वपूर्ण कार्य को भविष्य के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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