ePaper

जर्जर सड़क व पेयजल की समस्या से ग्रामीण बेहाल

Updated at : 01 Feb 2026 9:21 PM (IST)
विज्ञापन
जर्जर सड़क व पेयजल की समस्या से ग्रामीण बेहाल

बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा धुरकी का करवा पहाड़ गांव

विज्ञापन

बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा धुरकी का करवा पहाड़ गांव अनूप जायसवाल, धुरकी (गढ़वा) विकास के तमाम दावों के बावजूद जिले के धुरकी प्रखंड का करवा पहाड़ गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. करीब दो हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में आदिम जनजाति, दलित और पिछड़े वर्ग की बहुलता है, लेकिन विडंबना यह है कि ग्रामीण आज भी आदिम युग जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए अब तक एक भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है. करवा पहाड़ से धुरकी मुख्य सड़क तक जाने वाला रास्ता कच्चा और जर्जर है. जगह-जगह बड़े गड्ढे और नुकीले पत्थर उभरे होने के कारण पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है. खराब रास्ते के कारण गांव में ऑटो या अन्य सवारी वाहन आने से कतराते हैं, जिससे ग्रामीणों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क लगभग कट गया है. सबसे भयावह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब रात में कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ जाये या किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हो. ऐसी परिस्थितियों में मरीज को खाट या वैकल्पिक साधनों के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से जान का खतरा बना रहता है. गांव में सरकार की जल-नल योजना कागजों पर तो पहुंची है, लेकिन धरातल पर इसकी स्थिति बेहद दयनीय है. ग्रामीणों के अनुसार योजना का लाभ सभी टोलों तक नहीं पहुंच सका है. आज भी गांव का एक बड़ा हिस्सा स्वच्छ पेयजल से वंचित है और लोग पुराने व असुरक्षित जलस्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं. शिक्षा की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है. गांव में उच्च विद्यालय नहीं होने से परेशानी गांव में उच्च विद्यालय नहीं होने के कारण बच्चों को माध्यमिक शिक्षा के लिए 7 किलोमीटर दूर धुरकी या 5 किलोमीटर दूर टाटीदीरी जाना पड़ता है. लंबी दूरी और खराब रास्ते के चलते कई छात्र-छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है. बुनियादी सुविधाओं के अभाव का असर अब सामाजिक रिश्तों पर भी पड़ने लगा है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, बिजली और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग यहां अपने बच्चों का रिश्ता तय करने से कतराते हैं. क्या कहते हैं ग्रामीण ग्रामीण तेजू कोरवा, सुरेश चौधरी, नसीम अंसारी, गुलाब अंसारी और बिमलेश चौधरी ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आवेदन देकर समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है. जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण वे नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. क्या कहते हैं बीडीओ प्रखंड विकास पदाधिकारी विमल कुमार सिंह ने कहा गांव में सड़क निर्माण को लेकर वरीय अधिकारियों को लिखा जायेगा, जो आदेश आयेगा उसके आलोक में कार्य किया जायेगा. प्रखंड विकास पदाधिकारी विमल कुमार सिंह ने कहा गांव में सड़क निर्माण को लेकर वरीय अधिकारियों को लिखा जायेगा, जो आदेश आयेगा उसके आलोक में कार्य किया जायेगा.

विज्ञापन
Akarsh Aniket

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola