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पीटीआर से निकलकर बाघ ने शिकार किया, पशुधन की मौत

Updated at : 03 Jan 2025 7:40 PM (IST)
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पीटीआर से निकलकर बाघ ने शिकार किया, पशुधन की मौत

गढ़वा जिले के दक्षिणी वन क्षेत्र के इलाकों में नववर्ष में पहली बार बाघ ने अपने शिकार पर हमला किया है.

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रमकंडा, भंडरिया के जंगलों में घूम रहा बाघ, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट रमकंडा. गढ़वा जिले के दक्षिणी वन क्षेत्र के इलाकों में नववर्ष में पहली बार बाघ ने अपने शिकार पर हमला किया है. हालांकि उसे सफलता नही मिली. हालांकि बाघ का शिकार गंभीर रूप से घायल हो गया. घटना के बाद पशुपालकों की ओर से घायल पशुधन का इलाज किया जा रहा है. सूचना के बाद वन विभाग ने रमकंडा भंडरिया के क्षेत्रों में अलर्ट जारी करते हुए लोगों को जंगलों में नही जाने की चेतावनी जारी की है. इधर घटना के बाद वन विभाग की टीम बाघ को ट्रैक कर रही है. हालांकि वन विभाग को अभी तक ट्रैपिंग कैमराके तस्वीर या कोई फुटमार्क नहीं मिला है. लेकिन शिकार करने के तरीकों से विभाग बाघ के होने की संभावना व्यक्त की गयी है. जानकारी के अनुसार भंडरिया वन क्षेत्र के रोदो गांव के ठेकही टोला निवासी इंद्रदेव यादव अपने भैस को जंगल में चराने गया था. जहां गुरुवार की रात में जंगलों में चर रहे भैंस पर बाघ ने हमला कर दिया. वहीं रात गुजरने के बाद पशुपालक अपने भैंस का इलाज करा रहा है. उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले भंडरिया के संगाली गांव के जंगलों में बाघ के होने का दावा स्थानीय ग्रामीणों ने किया था. वहीं पिछले 13 नवंबर की रात बड़गड़ थाना क्षेत्र के बहेराखांड़ में पशुधन का शिकार करने के बाद भंडरिया क्षेत्र के जंगलों से होकर कोयल नदी पार कर बाघ पलामू टाइगर रिजर्व एरिया में पहुंच गया था. जिसकी पुष्टि वन विभाग और पीटीआर के अधिकारियों ने की थी. इधर इस घटना के बाद क्षेत्र में दहशत फैल चुका है. हालांकि बाघ के आदमखोर नही होने से वन विभाग भी राहत की सांस ले रहा है. सुबह होते तक 15 किमी दूर बैदेशी पहुंचा बाघ गुरुवार की रात रोदो में पशुधन पर हमला करने के बाद बाघ सुबह होते तक 15 किमी दूर रंका पूर्वी वन क्षेत्र के अधीन रमकंडा के बलिगढ़ के जंगलों में पहुंच गया. वहीं शिकार की खोज में दोपहर रिहायशी इलाकों में पहुंचकर पशुधन पर हमला कर दिया. चारों ओर जंगलों से घिरे बैदेशी टोला में पहुंचे बाघ ने हुलास सिंह के पशुधन पर हमला कर घायल कर दिया. लेकिन पशुधन की मौत हो गयी. ग्रामीण बताते हैं कि पहले हाथियों के आतंक से इस क्षेत्र के लोग परेशान रहते थे. वहीं अब बाघ के आने से दहशत का माहौल बन गया है. लोग शाम होते ही घरों में बंद हो जा रहे हैं. लोग बताते हैं कि ऐसे में अपने मवेशियों की सुरक्षा की उन्हें चिंता है. मार्च 2023 में कुटकु जंगल में बाघ ने किया था शिकार पिछले वर्ष मार्च महीने में भी मध्यप्रदेश से होकर छत्तीसगढ़ के रास्ते भंडरिया क्षेत्र में बाघ पहुंचा था. वहीं दो दिनों के अंदर तीन शिकार किया था. भंडरिया थाना क्षेत्र के कुटुकु के जंगल में गाय का शिकार कर उसका मांस खाते हुए वीडियो भी सामने आया था. ऐसे में दूसरे वर्ष भी टाइगर के आने से इस क्षेत्र के लोगों में दहशत है. हालांकि अब तक बाघ आदमखोर नहीं हुआ है. बताया गया कि करीब चार वर्षों के अंदर दूसरी बार इस क्षेत्र में बाघ पहुंचा है. उल्लेखनीय है कि गढ़वा का दक्षिणी वन क्षेत्र छतीसगढ़ के सीमावर्ती बलरामपुर के जंगली क्षेत्रों को छूता है. जहां से कनहर नदी पार कर हाथी और बाघ इस इलाके में पहुंच जाते हैं. टाइगर होने की संभावना, अलर्ट जारी किया गया है: डीएफओ इस संबंध में पूछे जाने पर गढ़वा दक्षिणी वन क्षेत्र के डीएफओ इबिन बेनी अब्राहम ने भी टाइगर के होने की संभावना व्यक्त की. कहा कि फिलहाल कैमरा ट्रैप में तस्वीर व फुटमार्क नहीं मिले हैं. लेकिन हमला करने का तरीका टाइगर का है. कहा कि वन विभाग की ओर से लोगों को अलर्ट किया गया है. वहीं ट्रेकिंग टीम काम कर रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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