ऐतिहासिक अष्टकोणीय सूर्य मंदिर की विशेष मान्यता, दूसरे राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु

Updated at : 23 Mar 2026 9:42 PM (IST)
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ऐतिहासिक अष्टकोणीय सूर्य मंदिर की विशेष मान्यता, दूसरे राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु

ऐतिहासिक अष्टकोणीय सूर्य मंदिर की विशेष मान्यता, दूसरे राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु

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गौरव पांडेय, श्री वंशीधर नगर गढ़वा जिले का श्री वंशीधर नगर इन दिनों पूरी तरह भक्ति के रंग में सराबोर है. लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के अवसर पर यहां के ऐतिहासिक सूर्य मंदिर परिसर में झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचे हैं. यह सूर्य मंदिर अपनी खास वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां सच्ची श्रद्धा से अर्घ्य देने और सूर्य देव की पूजा करने से कुष्ठ रोग और अन्य चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है. स्थानीय लोग इसकी तुलना बिहार के प्रसिद्ध देव सूर्य मंदिर से करते हैं. मंदिर के पास बहने वाली बाकी नदी के तट पर छठ पर्व को लेकर खास तैयारी की गयी है. घाटों को आकर्षक तरीके से सजाया गया है. प्रभात क्लब द्वारा वर्ष 1967 से लगातार सेवा कार्य किया जा रहा है. क्लब के सदस्य घाटों की सफाई, सुरक्षा, लाइटिंग और व्रतियों के ठहरने की बेहतर व्यवस्था कर रहे हैं. आयोजन समिति के अनुसार यहां की मान्यता इतनी प्रबल है कि लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर दूर-दूर से अर्घ्य देने आते हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ से आये सैकड़ों व्रती खरना के दिन से ही मंदिर परिसर में डेरा डाले हुए हैं. परिसर में व्रती पारंपरिक गीतों के बीच मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद तैयार कर रहे हैं. सुरक्षा के लिए प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किये हैं. व्रतियों का कहना है कि यहां सोने के श्री बंशीधर जी और सूर्य देव का एक साथ आशीर्वाद मिलता है. जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह जरूर पूरी होती है. चार दिवसीय अनुष्ठान के तीसरे दिन मंगलवार की शाम हजारों व्रती बाकी नदी में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित करेंगे. इसके बाद बुधवार सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का समापन होगा. वर्ष 1943 में हुई थी मंदिर की स्थापना इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1943 में राजमाता सीता देवी ने कराया था. मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अष्टकोणीय बनावट है. गर्भगृह में सात घोड़ों के रथ पर सवार भगवान सूर्य की भव्य प्रतिमा स्थापित है.

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

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