शर्मसार! मां की मौत के बाद भाग गये बेटे, 40 घंटे घर में पड़ा रहा शव, ग्रामीणों ने किया अंतिम संस्कार
Published by : Dipali Kumari Updated At : 10 Aug 2025 8:24 AM
Villagers ( सांकेतिक तस्वीर)
Jharkhand News: मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला गढ़वा से सामने आया है, यहां कलयुगी बेटे अपनी मां की मौत के बाद उनका शव घर में छोड़ भाग गये. 40 घंटे तक महिला का शव घर में पड़ा रहा. काफी इंतजार के बाद भी जब परिवार का कोई सदस्य नहीं आया, तो ग्रामीणों ने महिला का अंतिम संस्कार किया.
Jharkhand News: जिस मां ने 9 महीने अपने बेटों को कोख में पाला और अपना पूरा जीवन बच्चों के लिए समर्पित कर दिया, उन बेटों ने अपनी मां का श्राद्ध कर्म तक करना भी जरूरी नहीं समझा. मां की मौत के बाद ये कलयुगी बेटे शव को घर में ही छोड़कर भाग गये. मानवता को शर्मसार करने वाला यह मामला गढ़वा जिले से सामने आया है. यहां मां तेतरी देवी की मौत के बाद उनके तीनों बेटे अपने-अपने परिवार के साथ भाग निकलें. मौत के 40 घंटे तक उनका शव घर में ही पड़ा रहा. अंत में पड़ोसियों ने मिलकर महिला का अंतिम संस्कार किया.
डायरिया से मौत के बाद शव छोड़ भाग गये बेटे
गढ़वा जिले के भवनाथपुर पंचायत के बुका गांव के तीनकोनिया टोला निवासी तेतरी देवी (80) की गुरुवार को डायरिया से मौत हो गयी. इसके बाद तेतरी देवी के तीनों बेटे, बहू और पोते शव को घर में ही छोड़कर भाग गये. मौत के बाद करीब 40 घंटे तक तेतरी देवी का शव घर में ही पड़ा रहा. गांव वालों को उम्मीद थी थी कि परिवार का कोई न कोई सदस्य तेतरी देवी का अंतिम संस्कार करने जरूर आयेगा. इसी इंतजार में घंटों बीत गये, लेकिन कोई भी सदस्य उनकी खोज खबर लेने नहीं पहुंचा.
ग्रामीणों ने हिंदू रीति-रिवाज से कराया अंतिम संस्कार
घंटों इंतजार करने के बाद अंत में ग्रामीणों ने शव दफनाने का फैसला लिया. इसके लिए जेसीबी से गड्ढा खोदा जा रहा था. इसी बीच जिला परिषद सदस्य शर्मा रंजनी और मुखिया बेबी देवी को इसकी जानकारी हुई. दोनों जनप्रतिनिधि वहां पहुंचे और शव दफनाने से मना किया. उन्होंने कहा कि तेतरी देवी का अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज से ही होगा, जिसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से तेतरी देवी का अंतिम संस्कार किया गया. गांव के ही रामलाल भुइयां ने उन्हें मुखाग्नि दी.
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डायरिया के भय से भाग गये सभी- पुत्र
मृतका के पुत्र बिंदू बियार ने बताया कि गुरुवार को डायरिया से तेतरी देवी की मौत हो गयी. उसके पिता हरचरन बियार की मृत्यु पहले ही हो चुकी है. उसने कहा कि डायरिया के भय से परिवार के सभी सदस्य भाग गये और मां का अंतिम संस्कार नहीं किया.
माता-पिता को पुत्र ही देता है मुखाग्नि- ग्रामीण
इस पूरे मामले पर ग्रामीणों ने कहा कि हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, माता-पिता की मृत्यु होने पर पुत्र ही मुखाग्नि देता है. इससे मृतात्मा को मुक्ति मिलती है. लेकिन डायरिया के भय से कोई उनका अंतिम संस्कार करने नहीं आया. अंततः ग्रामीणों ने ही मिलकर हिंदू रीति-रिवाज से तेतरी देवी का अंतिम संस्कार किया.
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By Dipali Kumari
नमस्कार! मैं दीपाली कुमारी, एक समर्पित पत्रकार हूं और पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं, जहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पूर्व दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी कार्य करने का अनुभव है.
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