रहुल प्रकृति और आस्था का प्रतीक: डीसी

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रहुल प्रकृति और आस्था का प्रतीक: डीसी

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प्रतिनिधि, गढ़वा सरहुल पर्व के अवसर पर शुक्रवार को समाहरणालय सभागार में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया. उपायुक्त दिनेश यादव की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण के संकल्प को दोहराया गया. मौके पर उपायुक्त ने आदिवासी समुदाय के बीच पूजन सामग्री बांटी और सभी को पर्व की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि सरहुल का अर्थ मुंडारी भाषा में साल वृक्ष का त्योहार होता है. यह पर्व आदिवासी समुदाय की आस्था और प्रकृति के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है. इस दिन साल वृक्ष की पूजा कर ग्राम देवताओं को फूल और अन्न अर्पित किये जाते हैं, ताकि सुख-समृद्धि और अच्छी फसल हो सके. उपायुक्त ने बताया कि गढ़वा की कुल जनसंख्या का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जनजाति समुदाय का है. जिले के करीब 900 गांवों में से 600 गांवों में अनुसूचित जनजाति और 195 गांवों में आदिम जनजाति के लोग रहते हैं. उन्होंने कहा कि बड़गड़, भंडरिया, चिनिया, रंका और रमकंडा प्रखंडों में इनकी अच्छी संख्या है, जो हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासी समुदाय के योगदान से ही झारखंड के जंगल और परंपराएं सुरक्षित हैं. उपायुक्त ने आदिवासी समुदाय के प्रति आभार जताया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन योजनाओं के जरिए हर जरूरतमंद तक लाभ पहुंचाने के लिए हमेशा तत्पर है. इस कार्यक्रम में जिला कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश, कल्याण विभाग के कर्मी और आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद थे. कार्यक्रम ने प्रकृति पूजा के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश दिया.

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Akarsh Aniket

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