जिले का सर्राफा कारोबार प्रतिदिन डेढ़ करोड़ से घटकर 25 लाख पर पहुंचा

Published by : Akarsh Aniket Updated At : 21 May 2026 9:33 PM

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जिले का सर्राफा कारोबार प्रतिदिन डेढ़ करोड़ से घटकर 25 लाख पर पहुंचा

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प्रधानमंत्री की अपील से गढ़वा का सर्राफा बाजार में मंदी, कारोबारी नाराज – बाजार में ग्राहक की कमी, रोजगार पर भी असर जितेंद्र सिंह गढ़वा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद गढ़वा जिले का सर्राफा बाजार मंदी की चपेट में आ गया है. जिले के आभूषण व्यवसायियों का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील, सोने की लगातार बढ़ती कीमत और कर वृद्धि के कारण वैध कारोबार प्रभावित हुआ है. जिला सर्राफा संघ के जिला महामंत्री पंचम सोनी ने बताया कि अब बाजार में ग्राहकों की संख्या अचानक कम हो गयी है. इससे कारोबार पहले के मुकाबले केवल एक चौथाई रह गया है. पहले यहां प्रतिदिन लगभग एक से डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार होता था, जबकि अब यह घटकर महज 25 लाख रुपये रह गया है. इससे दुकानदारों के साथ-साथ इस व्यवसाय से जुड़े कारीगरों, मजदूरों और अन्य लोगों की आजीविका पर भी संकट गहराया है. स्वर्ण नगरी के रूप में उभर रहा था गढ़वा गढ़वा जिले में सोने-चांदी के कारोबार का तेजी से विस्तार हुआ था. वर्तमान में जिले में करीब 500 से अधिक आभूषण दुकानें संचालित हैं, जिनमें 200 से अधिक दुकानें केवल जिला मुख्यालय में हैं. शहर के प्रमुख बाजार और गली-मोहल्लों में सर्राफा दुकानें मौजूद हैं. व्यापारियों का कहना है कि गढ़वा का सर्राफा बाजार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ और जिले की पहचान ””स्वर्ण नगरी”” के रूप में बनने लगी थी. यहां तैयार आभूषणों की गुणवत्ता और डिजाइन के कारण दूर-दराज के ग्राहक भी खरीदारी के लिए आते थे. तीन राज्यों तक फैला है कारोबार गढ़वा का सर्राफा बाजार सिर्फ खुदरा व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह होलसेल कारोबार का भी बड़ा केंद्र है. जिले की भौगोलिक स्थिति इसे व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है क्योंकि इसकी सीमाएं उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ से जुड़ी हैं. गढ़वा से न केवल जिले के 20 प्रखंडों, बल्कि पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों तक आभूषण की आपूर्ति होती है. कई छोटे व्यापारी गढ़वा से थोक में आभूषण खरीदकर अपने क्षेत्रों में बेचते हैं. पलामू प्रमंडल में गढ़वा का सर्राफा बाजार सबसे बड़ा माना जाता है. टैक्स बढ़ोतरी से बढ़ी बिना बिल खरीदारी सोने पर कर छह प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत होने के बाद वैध कारोबार और मुश्किल में पड़ गया है. जीएसटी बिल के साथ प्रति 10 ग्राम सोना लगभग 1.65 लाख रुपये में बिक रहा है, जबकि बिना बिल नकद में यही सोना 1.55 लाख रुपये में मिल रहा है. व्यापारी बताते हैं कि कई ग्राहक सस्ते दर के लालच में बिना बिल खरीदारी कर रहे हैं. इससे सरकार को राजस्व की हानि हो रही है और अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है. रोजगार पर पड़ रहा व्यापक असर गढ़वा में सर्राफा व्यवसाय हजारों लोगों को रोजगार देता है. इसमें दुकानदार, कारीगर, डिजाइनर, पॉलिश कर्मी, मजदूर और परिवहन से जुड़े लोग शामिल हैं. कारोबार घटने के कारण अब कारीगरों के पास काम कम बचा है. कई दुकानों में कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है और छोटे दुकानदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. कारोबार पर पड़ रहा है प्रतिकूल असर: पंचम सोनी गढ़वा जिला सर्राफा संघ के जिला महामंत्री पंचम सोनी ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद सर्राफा व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ा है. उन्होंने बताया कि आभूषण का कारोबार अब लगभग 25 प्रतिशत पर सिमट गया है. उन्होंने कहा कि इस व्यवसाय से जुड़े लगभग 500 व्यापारी और उनके परिवार आर्थिक परेशानी में हैं. सरकार की अपील से वैध व्यापार कमजोर होगा और अवैध कारोबार बढ़ेगा. इसके साथ ही सरकार के राजस्व को भी नुकसान होगा.

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