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नाबालिग से दुष्कर्म के दो आरोपी को आजीवन कारावास

Updated at : 28 Feb 2025 9:41 PM (IST)
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नाबालिग से दुष्कर्म के दो आरोपी को आजीवन कारावास

नाबालिग से दुष्कर्म के दो आरोपी को आजीवन कारावास

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गढ़वा. विशेष न्यायाधीश पॉक्सो की अदालत में शुक्रवार को नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने के दो आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक-एक लाख रुपये आर्थिक जुर्माना की सजा सुनायी है. पॉक्सो वाद संख्या 27 /2022 में सजा पानेवालों में झलुआ निवासी हारून रशीद उर्फ हारूल रशीद तथा बानुटिकर गांव निवासी फरियाद आलम शामिल है. विदित हो कि खरौंधी थाना क्षेत्र के सुंडी गांव निवासी पीड़िता के परिवार के लोग सहिजना हनुमान नगर में रहते थे. जबकि पीड़ित छात्रा गढ़वा शहर के एक विद्यालय में नौवीं कक्षा में पढ़ती थी. विद्यालय जाने के क्रम में 22 दिसंबर 2021 की सुबह 8:15 बजे रास्ते में हथियार का भय दिखाकर हारून रशीद ने चार पहिया वाहन में अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर उसका अपहरण कर लिया. इसके बाद रांकी मुहल्ला स्थित हीरो शोरूम के समीप स्थित स्व कृष्णा मेहता के घर में ले जाकर दुष्कर्म किया. इस दौरान अपराध छिपाने के लिए पीड़िता की हत्या करने का भी प्रयास किया गया. लेकिन तभी सूचना के आधार पर घटनास्थल पर पहुंची गढ़वा थाना पुलिस ने पीड़िता को बचा लिया. पीड़िता की मां ने की थी लिखित शिकायत : इधर पीड़िता की मां के लिखित आवेदन के आधार पर गढ़वा थाना में मामला दर्ज किया गया और अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. इस मामले में अप्राथमिक अभियुक्त फरियाद आलम के विरुद्ध आरोपपत्र ( संख्या 219/ 2022 दिनांक 25 अप्रैल 2022) न्यायालय में समर्पित किया गया. वहीं हारून रशीद उर्फ हारूल के विरुद्ध 25 अप्रैल 2022 को आरोप गठन किया गया. जबकि फरियाद आलम के विरुद्ध 12 जुलाई 2022 को आरोप गठन कर पोक्सो संख्या 27/ 2022 के तहत वाद की कार्यवाही प्रारंभ की गयी. कुल 11 लोगों का साक्ष्य प्रस्तुत किया गया : दोनों वादों की कार्रवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 साक्षियों का साक्ष्य प्रस्तुत किया गया. ये साक्ष्य कलमबद्ध करते हुए न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेज एवं साक्ष्य के आधार पर दोनों आरोपी को दोषी करार देते हुए तथा सजा पर सुनवाई करते हुए हारून रशीद को 10 वर्षों का सश्रम कारावास एवं 50 हजार रुपये आर्थिक जुर्माना, जबकि पॉक्सो एक्ट में दोनों आरोपी को 20-20 साल का सश्रम कारावास एवं एक लाख रु का आथिक जुर्माना लगाया गया. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता नवीन चन्द्र सिंह एवं कुमार अंकेश नारायण ने पैरवी की. जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभारी लोक अभियोजक उमेश दीक्षित ने पैरवी की.

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