पलामू प्रमंडल में ''''राज्यसभा कार्ड'''' के बहाने झामुमो ने की बड़ी घेराबंदी

Published by : Akarsh Aniket Updated At : 07 Jun 2026 9:43 PM

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पलामू प्रमंडल में 'राज्यसभा कार्ड' के बहाने झामुमो ने की बड़ी घेराबंदी

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अविनाश, गढ़वा झारखंड की राजनीति में पलामू प्रमंडल हमेशा से सत्ता की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है. इस बार राज्यसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने पूर्व मंत्री बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाकर न केवल सभी को चौंकाया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के ””मिशन विस्तार”” में पलामू प्रमंडल शीर्ष प्राथमिकता पर है. राज्य गठन के बाद संभवतः यह पहला अवसर है जब किसी राजनीतिक दल ने राज्यसभा चुनाव के लिए पलामू प्रमंडल के किसी नेता पर दांव लगाया है. इसके जरिए झामुमो क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रहा है.

गढ़वा रहा है झामुमो की राजनीति का केंद्र

पलामू प्रमंडल में झामुमो के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो गढ़वा की भूमिका हमेशा केंद्रीय रही है. वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रमंडल में झामुमो का खाता खुला था, जब कामेश्वर बैठा ने पार्टी के सिंबल पर जीत दर्ज की थी. दिलचस्प बात यह रही कि उस समय नवजवान संघर्ष मोर्चा के प्रमुख और वर्तमान भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने इस जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. उन्होंने कामेश्वर बैठा को झामुमो, कांग्रेस और नवजवान संघर्ष मोर्चा का संयुक्त उम्मीदवार घोषित कराया था. साथ ही स्टार प्रचारक की भूमिका निभाते हुए उनकी जीत सुनिश्चित करने में अहम योगदान दिया था.

दस साल बाद हुई जोरदार वापसी

2009 के बाद लगभग एक दशक तक पलामू प्रमंडल में झामुमो राजनीतिक रूप से कमजोर रहा. हालांकि वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जोरदार वापसी की. पहली बार विधानसभा स्तर पर प्रमंडल में झामुमो का खाता खुला. इस चुनाव में गढ़वा सीट से मिथिलेश कुमार ठाकुर और लातेहार सीट से बैजनाथ राम ने जीत दर्ज की. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पार्टी नेतृत्व की नजर में इस क्षेत्र की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोनों नेताओं को मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गयी थी. पलामू प्रमंडल में झामुमो के राजनीतिक विस्तार की धुरी हमेशा गढ़वा रहा है. वर्ष 2009 में जहां भानु प्रताप शाही की भूमिका अहम रही, वहीं वर्ष 2019 में पार्टी को मुख्यधारा में मजबूती से स्थापित करने में मिथिलेश कुमार ठाकुर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही.

हार के बाद भी पलामू पर कायम है फोकस

वर्ष 2024 के चुनाव में राजनीतिक समीकरणों के कारण मिथिलेश कुमार ठाकुर और बैजनाथ राम को हार का सामना करना पड़ा. हालांकि भवनाथपुर विधानसभा सीट पर भानु प्रताप शाही को चुनौती देने की मिथिलेश ठाकुर की रणनीति सफल रही और झामुमो प्रत्याशी अनंत प्रताप देव ने जीत दर्ज की. अब राज्यसभा चुनाव में बैजनाथ राम के नाम पर मुहर लगने से यह स्पष्ट हो गया है कि चुनावी हार के बावजूद पलामू प्रमंडल झामुमो के मुख्य फोकस क्षेत्रों में शामिल है. वर्तमान में पार्टी के केंद्रीय महासचिव के रूप में मिथिलेश कुमार ठाकुर संगठन विस्तार की बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं.

भाजपा के सामने किला बचाने की चुनौती

एक ओर जहां झामुमो अपने पुराने नेताओं को मजबूत करने और नये चेहरों को जोड़ने में जुटा है, वहीं भाजपा अपने इस पारंपरिक गढ़ को बचाने की कोशिश कर रही है. इसके लिए पार्टी ने अपने फायरब्रांड नेता भानु प्रताप शाही को आगे किया है. हाल ही में संपन्न नगर निकाय चुनाव में मेदिनीनगर से अरुणा शंकर को मेयर पद पर जीत दिलाकर भानु प्रताप शाही ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक क्षमता और क्षेत्र में मजबूत पकड़ का परिचय दिया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वरिष्ठ नेता इंदर सिंह नामधारी के भाजपा से अलग होने के बाद पार्टी को पलामू प्रमंडल में भानु प्रताप शाही के रूप में ऐसा बड़ा चेहरा मिला है, जिसकी स्वीकार्यता प्रमंडल के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में भी है.

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