डंडा प्रखंड के अस्तित्व को समाप्त करना उचित नहीं: सत्येंद्रनाथ तिवारी

डंडा प्रखंड के अस्तित्व को बचाने की मांग विधानसभा में गूंजी
डंडा प्रखंड के अस्तित्व को बचाने की मांग विधानसभा में गूंजी प्रतिनिधि, गढ़वा झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को गढ़वा के डंडा प्रखंड के अस्तित्व को बरकरार रखने का मामला उठा. गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने सदन में डंडा प्रखंड को यथावत रखने की पुरजोर मांग की. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि स्थानीय जनभावनाओं और जनता की सुविधा को देखते हुए इस प्रखंड के अस्तित्व को समाप्त करना उचित नहीं है. विधायक ने तथ्यों का हवाला देते हुए सदन को बताया कि डंडा प्रखंड का गठन वर्ष 2008 में हुआ था. तत्कालीन मुख्यमंत्री (अब दिवंगत) शिबू सोरेन ने इस प्रखंड का उद्घाटन कर क्षेत्र की जनता को विकास की नयी सौगात दी थी. पिछले 18 वर्षों से यह प्रखंड सुचारू रूप से कार्य कर रहा है और हजारों ग्रामीण अपनी सरकारी सुविधाओं के लिए इसी मुख्यालय पर निर्भर हैं. गढ़वा के उपायुक्त ने भौगोलिक परिस्थितियों और कुछ तकनीकी नियमों का हवाला देते हुए इस प्रखंड के अस्तित्व को समाप्त करने की अनुशंसा की है. विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि यदि प्रखंड का दर्जा समाप्त होता है, तो इससे आम जनों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा और विकास की गति थम जायेगी. सदन के माध्यम से विधायक ने राज्य सरकार कहा कि डंडा प्रखंड के लोगों की आकांक्षाएं इस प्रशासनिक इकाई से जुड़ी हैं. प्रखंड का दर्जा यथावत रखा जाये ताकि सुदूरवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों को प्रखंड कार्यालय की सुविधा मिलती रहे.
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