गढ़वा में तीन महीनों में 302 लोगों को सांप ने डसा, 6 की मौत
डीपीएम गौरव कुमार : प्रभात खबर
गढ़वा में बारिश के कारण सांपों का आतंक बढ़ा है. तीन महीने में 302 लोग सर्पदंश का शिकार हुए। झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल जाने की सलाह दी गई है.
गढ़वा से प्रभाष मिश्रा की रिपोर्ट
गढ़वा जिले में सर्पदंश के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. खेतों में धान रोपनी का काम हो या ग्रामीण इलाकों में रात की आवाजाही, जहरीले सांपों का खतरा हर जगह मंडरा रहा है. बीते तीन महीनों (मई से 28 जुलाई) के भीतर जिले में 302 लोग सर्पदंश का शिकार हो चुके हैं, जबकि 6 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है. कई मामले ऐसे भी हैं जो झाड़-फूंक और रेफर के दौरान रास्ते में दम तोड़ने के कारण सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो सके.ताजा मामला बिशुनपुरा गांव का है, जहां धान रोपकर घर लौट रहे किसान विजय पाल (पिता- हरिहर पाल) को झाड़ी में छिपे सांप ने डस लिया. समय रहते परिजनों ने उन्हें गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज जारी है.
जुलाई में सबसे ज्यादा आया मामला
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो बारिश बढ़ने के साथ-साथ सर्पदंश के मामले तेजी से उछले हैं:
मई महिने में 44 मामले सामने आए हैं, वहीं जून में 62, जुलाई (28 जुलाई तक) 196 मामले सामने आए हैं यानी तीन महिनों मे कुल 302 लोगों को सांप ने काटा, जिसमें से 6 की मौत हो गई.
बारिश बना जानलेवा
क्यों बढ़ रहा है खतरा बारिश के कारण सांपों के प्राकृतिक बिलों में पानी भर जाता है, जिससे वे सुरक्षित और सूखे स्थानों की तलाश में आबादी, झाड़ियों, धान के खेतों और लकड़ी के ढेरों की तरफ रुख कर रहे हैं. रात में अंधेरे में चलना और बिना जूते-चप्पल खेतों में काम करना ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है.
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स्वास्थ्य विभाग का दावा: एंटी-वेनम की कोई कमी नहीं
सर्पदंश के बढ़ते मामलों पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) गौरव कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि गढ़वा सदर अस्पताल समेत जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है.डॉक्टरों की टीम 24 घंटे मुस्तैद है. ग्रामीणों से अपील है कि सर्पदंश के बाद ओझा-गुनी या झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय बर्बाद न करें. मरीज को सीधे नजदीकी सरकारी अस्पताल लाएं, समय पर इलाज से जान पूरी तरह बचाई जा सकती है.
झाड़-फूंक और देरी बनी मौत की सबसे बड़ी वजह
ग्रामीण इलाकों में आज भी जागरूकता की कमी के कारण लोग पहले स्थानीय ओझा या तांत्रिक के पास चले जाते हैं. जब तक मरीज की स्थिति बिगड़ती है, तब तक काफी जहर शरीर में फैल चुका होता है. इसके बाद जब मरीज को रिम्स या अन्य बड़े सेंटरों के लिए रेफर किया जाता है, तो कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं.
सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार
पांच जरूरी बातें जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए-
खेतों में सुरक्षा: धान रोपनी या झाड़ियों में जाते समय गमबूट (ऊंचे जूते) और फुल पैंट जरूर पहनें.
टॉर्च का प्रयोग: रात में घर से बाहर निकलते समय या शौच के लिए जाते वक्त टॉर्च साथ रखें.
सफाई रखें: घर के आसपास कचरा, लकड़ी या गोबर का ढेर न जमने दें.
अफ़वाहों से बचें: सांप काटने पर मरीज को डराएं नहीं, उसे शांत रखें ताकि ब्लड प्रेशर न बढ़े.
अस्पताल तुरंत पहुंचे: काटी गई जगह को कसकर न बांधें और बिना देरी किए सरकारी अस्पताल रुख करें.
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