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केतार में जंगलों पर संकट, हरे पेड़ों की हो रही अंधाधुंध कटाई

Updated at : 28 Feb 2026 9:21 PM (IST)
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केतार में जंगलों पर संकट, हरे पेड़ों की हो रही अंधाधुंध कटाई

ग्रामीणों ने कहा- नहीं होती है नियमित निगरानी, जागरूकता अभियान चलाने की मांग

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ग्रामीणों ने कहा- नहीं होती है नियमित निगरानी, जागरूकता अभियान चलाने की मांग

संदीप कुमार, केतार

केतार प्रखंड क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जंगलों से हरे पेड़ों की कटाई जारी है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि 14336.32 एकड़ में फैला वन क्षेत्र दिन-ब-दिन सिकुड़ता जा रहा है. प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में हरे पौधे और पेड़ जलावन व घोरान के नाम पर काटे जा रहे हैं. वहीं वन पट्टा के नाम पर भी जंगलों की कटाई कर अवैध कब्जा किया जा रहा है. वन विभाग स्टाफ की कमी और कार्यालय के भवनाथपुर में होने का हवाला देता है. दूसरी ओर केतार क्षेत्र में तैनात इक्का-दुक्का वनकर्मी भी अपने आवंटित क्षेत्र से अक्सर नदारद रहते हैं और भवनाथपुर में रहने की बात कहते हैं. भगवान घाटी, पीपरा पानी, नारायण वन, परसोडीह, अमराही दह, मेरौनी जंगल, परती, कुश्वानी, बघवनवा और बतो कला सहित कई वन क्षेत्रों से प्रतिदिन हरे पेड़ों की कटाई हो रही है. सब कुछ सामने होने के बावजूद विभागीय सहयोग नहीं मिलने के कारण ग्रामीण और राहगीर चुप्पी साधे हुए हैं. एक दशक पहले तक वन विभाग गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाता था. गांव स्तर पर वन समितियों का गठन कर नियमित भ्रमण और निगरानी की जाती थी. वर्तमान में यह व्यवस्था पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है. नयी बनी समितियां कागजों तक सीमित रह गयी हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि वन समिति और वनकर्मी अब सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं में पत्थर-गिट्टी ढुलाई जैसे कार्यों में अधिक रुचि दिखा रहे हैं, जबकि जंगल संरक्षण की जिम्मेदारी पीछे छूट गयी है. लगातार कटाई के कारण कभी इन जंगलों में विचरण वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय नहीं बचा है. पानी और भोजन की तलाश में जानवर सड़कों पर भटक रहे हैं. कई वाहन की चपेट में आ रहे हैं तो कई शिकारियों का शिकार बन रहे हैं. ग्रामीणों का मानना है कि गांव-गांव में दोबारा जागरूकता बैठक कर सक्रिय वन समितियों का पुनर्गठन, नियमित निगरानी और बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाकर ही जंगलों को बचाया जा सकता है.

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एक्सपर्ट बोले

वन विभाग को सक्रिया होने की जरूरत: विजय सिंह

एक दशक पूर्व वन समिति के अध्यक्ष रह चुके चांदडीह गांव निवासी विजय सिंह ने बताया कि जंगल बचाने के लिए सबसे पहले वन विभाग को सक्रिय होना होगा. विभागीय सहयोग नहीं मिलने के कारण वन समिति के सदस्य विवश हो जाते हैं. वर्तमान में वन समिति नाम मात्र की रह गयी है और शासन का भी इस ओर ध्यान नहीं है. यदि यही स्थिति रही तो वन पूरी तरह उजड़ जायेंगे.

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लोगों ने कहा

जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत: ज्वाला प्रसाद

जिला परिषद सदस्य ज्वाला प्रसाद ने कहा कि जंगलों की लगातार कटाई और दोहन के कारण लंगूर और नीलगाय सहित कई वन्यजीव अब रिहायशी इलाकों में घुसकर नुकसान पहुंचा रहे हैं. वनों की कटाई रोकने और पौधरोपण के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है.

विभाग की निष्क्रियता के कर बर्बाद हो रहे जंगल: चंद्रावती देवी

प्रखंड प्रमुख चंद्रावती देवी ने कहा कि वन विभाग की निष्क्रियता के कारण प्रतिदिन जंगल बर्बाद हो रहे हैं. जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में सक्रिय ग्रामीणों की टीम बनाकर लगातार निगरानी और पौधरोपण अभियान चलाना जरूरी है.

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कटाई रोकने के लिए जनसहभागिता जरूरी: वनरक्षी

वनरक्षी ओमप्रकाश उरांव ने कहा कि जंगल केवल वन विभाग के सहारे नहीं बचाये जा सकते. इसके लिए जनसहभागिता आवश्यक है. जनप्रतिनिधि और जागरूक ग्रामीण वन विभाग के साथ मिलकर कटाई रोकने में सहयोग करें, तभी स्थिति सुधरेगी. उन्होंने यह भी कहा कि जंगलों की कटाई में महिलाएं अधिक सक्रिय रहती हैं, जिससे कार्रवाई के दौरान कठिनाई होती है.

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Akarsh Aniket

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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