प्रशासन की कार्रवाई से ग्रामीणों में रोष

Published at :18 Dec 2015 8:24 AM (IST)
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प्रशासन की कार्रवाई से ग्रामीणों में रोष

गढ़वा : बरडीहा प्रखंड के ओबरा गांव स्थित फुटबॉल के मैदान में पूर्व सरपंच सुरेश मेहता की अध्यक्षता में ग्रामीणों की बैठक हुई. जिसमें बीते दिनों राशन डीलर के मामले में पुलिस द्वारा निर्दोष ग्रामीणों पर प्राथमिकी दर्ज किये जाने को लेकर क्षोभ व्यक्त किया गया. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि एक […]

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गढ़वा : बरडीहा प्रखंड के ओबरा गांव स्थित फुटबॉल के मैदान में पूर्व सरपंच सुरेश मेहता की अध्यक्षता में ग्रामीणों की बैठक हुई. जिसमें बीते दिनों राशन डीलर के मामले में पुलिस द्वारा निर्दोष ग्रामीणों पर प्राथमिकी दर्ज किये जाने को लेकर क्षोभ व्यक्त किया गया. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि एक हस्ताक्षर अभियान चलाकर इसे मुख्यमंत्री को सौंपा जायेगा.

जिसमें मुख्यमंत्री से मामले में न्याय की गुहार लगायी जायेगी. बैठक में ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कि पुलिस ने मामले में एकतरफा कार्रवाई करते हुए निर्दोष लोगों को अभियुक्त बनाया है, जो उचित नहीं है.

ग्रामीण डीलर से दो महीने के बकाया राशन की मांग कर रहे थे. यह कोई अपराध नहीं है. बैठक में सुरेश मेहता, कृष्णा यादव, हरि उरांव, रामाशीष मेहता, शंभु मेहता, हरिकिशुन उरांव, युगेश्वर उरांव, रामदेव यादव, सुनील यादव, अमरनाथ यादव, अजय रजवार सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे.

क्या है मामला : जानकारी के अनुसार बभनी के डीलर शंभु रजवार द्वारा दो माह(अक्तूबर व नवंबर) का राशन लाभुकों को नहीं दिया गया था. इसके बाद ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक सह स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी, उपायुक्त, एसडीओ एवं बीडीओ को आवेदन देकर राशन दिलाने की मांग की थी. साथ ही एमओ पर भी लापरवाही बरतने के मामले में कार्रवाई की मांग की थी.

इसके बावजूद कुछ नहीं होने पर ग्रामीणों ने 181 नंबर पर मुख्यमंत्री से मामले की शिकायत की. इसके बाद सरकार के निर्देश पर एसडीओ वहां पहुंचे और लोगों को आश्वस्त किया कि उन्हें राशन मिलेगा. इसके लिए उन्होंने तिथि भी तय की. लेकिन एसडीओ द्वारा निर्धारित तिथि को भी राशन नहीं मिला, तब आक्रोशित लाभुकों ने रोड जाम कर दिया.

इसके बाद बरडही व मझिअांव के बीडीओ प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे पदाधिकारियों ने पुन: एक तिथि तय कर उन्हें लिखित आश्वासन दिया. लेकिन उस तिथि को भी लाभुकों को राशन नहीं मिला. अगले तारीख में एमओ व बीडीओ पहुंचे और राशन डीलर पर कार्रवाई करते हुए दुकान को सील कर दिया. इसके बाद ग्रामीण एमओ रविरंजन वर्मा पर कार्रवाई को लेकर आक्रोशित हो गये और पदाधिकारी व ग्रामीणों के बीच तू-तू मैं-मैं हुई और ग्रमीणों ने पदाधिकारियों को घंटे घेरे रखा. इसके बाद एमओ ने लिखित आश्वासन दिया. इसके बाद भी बात नहीं बनी तो, एमओ ने डीलर पर प्राथमिकी दर्ज करायी.

साथ ही वहां के युवा समाजसेवी पुष्परंजन सहित अज्ञात लोगों पर भी प्राथमिकी दर्ज करवायी गयी. इसके बाद पुलिस ने मामले का अनुसंधान किया और इसमें गांव के ही नंदू राम, अरविंद राम, मुकेश मेहता, विपिन मेहता, अजय विश्वकर्मा, योगेंद्र उरांव, संतोष गुप्ता पर सरकारी काम में बाधा डालने आदि का आरोप लगाते हुए उन पर धारा 307 लगाया गया.

साथ ही गांव के दर्जनों लोगों को मामले का साक्षी भी बनाया गया. जिन लोगों को साक्षी बनाया गया, तो वे घटना के दिन गांव में नहीं थे और न ही उन्हें इस मामले की जानकारी थी. इसी बात को लेकर गुरुवार को बैठक में हस्ताक्षर अभियान चलाने का निर्णय लिया गया.

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