प्रदोष व्रत कब है 28 या 29 अप्रैल, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Published by :Radheshyam Kushwaha
Published at :27 Apr 2026 4:02 PM (IST)
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Pradosh Vrat 2026

प्रदोष व्रत

Pradosh Vrat 2026: वैशाख मास का दूसरा प्रदोष व्रत 28 अप्रैल को रखा जाएगा, क्योंकि पंचांग के अनुसार इसी दिन तिथि और प्रदोष काल का संयोग मिल रहा है. इस प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है.

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Pradosh Vrat 2026: वैशाख शुक्ल प्रदोष व्रत बहुत ही खास है, क्योंकि इस दिन शिव पूजा के साथ हनुमान जी की उपासना का विशेष फल मिलेगा. इसके साथ ही जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होगा, उनके लिए यह व्रत लाभकारी रहेगा. क्योंकि भौम प्रदोष व्रत की पूजा से मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव शांत होगा. वैशाख शुक्ल प्रदोष व्रत 28 अप्रैल को रखा जाएगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त और त्रिपुष्कर योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है. आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ समय…

भौम प्रदोष व्रत 2026

  • वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 अप्रैल 2026 दिन मंगलवार की शाम लगभग 7 बजकर 22 मिनट पर
  • वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 अप्रैल 2026 दिन बुधवार की शाम लगभग 7 बजकर 32 मिनट पर
  • प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना शास्त्रों में उत्तम बताया गया है.
  • पंचांग के अनुसार 28 अप्रैल को प्रदोष काल मिल रहा है, इसलिए भौम प्रदोष व्रत 28 अप्रैल को रखा जाएगा.

भौम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त 2026

  • प्रदोष काल मुहूर्त: 28 अप्रैल की शाम 6 बजकर 22 बजे से रात 9 बजकर 04 मिनट तक
  • पूजा का सर्वोत्तम समय: 28 अप्रैल की शाम 07 बजे से रात 8 बजकर 30 मिनट तक

प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
  • भगवान शिव-पार्वती का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें.
  • पूरे दिन सात्विक रहें और मन को शांत बनाए रखें.
  • प्रदोष काल में पूजा स्थान को साफ और पवित्र करें.
  • शिवलिंग स्थापित कर जल, दूध, दही, शहद से अभिषेक करें.
  • गंगाजल से शुद्धि कर बेलपत्र, धतूरा, पुष्प अर्पित करें.
  • चंदन, अक्षत चढ़ाकर विधिपूर्वक पूजन की तैयारी पूरी करें.
  • घी का दीपक और धूप जलाकर श्रद्धा से पूजा करें.
  • ॐ नमः शिवाय मंत्र जपें और शिव चालीसा का पाठ करें.
  • अंत में आरती उतारकर भगवान को भोग लगाएं और प्रसाद बांटें.

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है, जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तब इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है, जो मंगल ग्रह की कृपा पाने के लिए विशेष फलदायी माना जाता है, इस व्रत को करने से जीवन की बाधाएं, ऋण, रोग और शत्रु संबंधी कष्ट कम होते हैं. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से शिव-पार्वती की पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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