शक्षिा के बाजारीकरण का विरोध

Published at :13 Dec 2015 6:13 PM (IST)
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शक्षिा के बाजारीकरण का विरोध

शिक्षा के बाजारीकरण का विरोधनगरऊंटारी (गढ़वा). एआइडीएसअो के शिक्षा के निजीकरण, व्यवसायीकरण व बाजारीकरण का विरोध किया है. एआइडीएसअो के गढ़वा इकाई ने जारी विज्ञप्ति में कहा है कि सरकार शिक्षा के दायित्व से अपना हाथ खींचना चाहती है. आगामी 15 दिसंबर से 18 दिसंबर तक विश्व व्यापार संगठन का दसवां प्रतिनिधि सम्मेलन केनिया के […]

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शिक्षा के बाजारीकरण का विरोधनगरऊंटारी (गढ़वा). एआइडीएसअो के शिक्षा के निजीकरण, व्यवसायीकरण व बाजारीकरण का विरोध किया है. एआइडीएसअो के गढ़वा इकाई ने जारी विज्ञप्ति में कहा है कि सरकार शिक्षा के दायित्व से अपना हाथ खींचना चाहती है. आगामी 15 दिसंबर से 18 दिसंबर तक विश्व व्यापार संगठन का दसवां प्रतिनिधि सम्मेलन केनिया के नैरोबी में होने जा रहा है, जिसमें शिक्षा के निजीकरण, बाजारीकरण तथा व्यवसायीकरण करने की योजना है. जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि सन 1991 में सात प्रतिशत छात्र निजी संस्थानों में पढ़ते ते जो 25 वर्षों बाद बढ़ कर 49 प्रतिशत हो गया है. विश्व व्यापार संगठन व सरकार इसे शत-प्रतिशत करना चाहती है. शिक्षा को निजी हाथों में देने से शिक्षा का अधिकार समाप्त हो सकता है तथा निजी नियमों को छात्रों पर थोपा जा सकता है. एआइडीएसअो सरकार की इस सोच का विरोध करती है.

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