1...मलेरिया से जूझ रहे हैं सेमरखाड़ गांव के आदिवासी

Published at :01 Dec 2015 7:25 PM (IST)
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1...मलेरिया से जूझ रहे हैं सेमरखाड़ गांव के आदिवासी

1…मलेरिया से जूझ रहे हैं सेमरखाड़ गांव के आदिवासीस्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंचने से सरकार से निराश हैं आदिवासीगांव में बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं ग्रामीणअब तक तीन लोगों की हो चुकी है मौत1जीडब्ल्यूपीएच 7-सेमरखाड़ गांव का आदिवासी परिवार 1जीडब्ल्यूपीएच 8-घटना की जानकारी देते गोवर्द्धन सिंह प्रतिनिधि, रंका(गढ़वा). रंका प्रखंड के […]

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1…मलेरिया से जूझ रहे हैं सेमरखाड़ गांव के आदिवासीस्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंचने से सरकार से निराश हैं आदिवासीगांव में बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं ग्रामीणअब तक तीन लोगों की हो चुकी है मौत1जीडब्ल्यूपीएच 7-सेमरखाड़ गांव का आदिवासी परिवार 1जीडब्ल्यूपीएच 8-घटना की जानकारी देते गोवर्द्धन सिंह प्रतिनिधि, रंका(गढ़वा). रंका प्रखंड के आदिवासी बहुल सेमरखाड़ गांव इस समय मलेरिया की चपेट में है. इस गांव में अभी तक दो दर्जन से ज्यादा लोग मलेरिया से पीड़ित हैं. जो फिलहाल मलेरिया की चपेट में हैं, उनमें कुलवासी देवी, उसकी बहू लीलावती देवी, दिलकेश्वर सिंह, रामचंद्र सिंह, शंकर सिंह के तीन महीने की पुत्री, जोखन सिंह की पुत्री, मोहरमानी कुमारी, धर्मदेव सिंह की पुत्री सीता कुमारी, मनबसिया देवी, सुखलाल सिंह, सबिता कुमारी आदि के नाम शामिल हैं. सभी इलाज के लिए भगवान भरोसे पड़े हुए हैं. आजादी के 67 साल बाद सेमरखाड़ गांव की यह बदहाल स्थिति सरकार के क्रियाकलापों पर पूरी तरह से सवाल खड़ा कर रहे हैं. यह गांव अभी भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. इस गांव में रहनेवाले आदिवासी पुरानी शैली में अपना जीवन बसर कर रहे हैं. गांव में जाने के लिए न सड़क है, न वहां स्वास्थ्य की व्यवस्था. न नही गांव में अभीतक पीने के पानी की सुविधा दी गयी है. गांव में कोई भी चापाकल नहीं रहने के कारण ग्रामीण कुंए का ही पानी पीते हैं. आदिवासियों में अधिकांश अशिक्षित होने के कारण ग्रामीणों के लिये सरकार द्वारा उपलब्ध सरकारी सुविधाओं की जानकारी से भी ये अनभिज्ञ हैं. किसी भी बीमारी की स्थिति में ये आदिवासी आज भी सरकारी अस्पतालों में जाने के बजाय देशी चिकित्सक से गांव में ही इलाज कराते हैं. इसके कारण गंभीर स्थिति में अक्सर इनकी मौत हो जाती है. इस समय करीब दो दर्जन से ज्यादा लोग मलेरिया से पीड़ित हैं. तीन लोगों की मौत हो चुकी है. इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन आदिवासियों के इलाज के लिए सुध नहीं ली गयी है. अभी तक कोई भी चिकित्सकों की टीम गांव में नहीं पहुंची है.पैसे के अभाव में बाहर नहीं जा रहे हैं मरीज ग्रामीण गोवर्द्धन सिंह से बात करने पर उसने बताया कि गांव में तीन लोग मर चुके हैं. कई और बीमारी से जूझ रहे हैं. लोगों को बुखार के बाद दस्त होने लगता है. पैसे के अभाव में लोग इलाज के लिए बाहर नहीं जा पा रहे हैं. बाहर से कोई चिकित्सक भी इन मरीजों की हाल जानने के लिए नहीं पहुंचे हैं.

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