चादरपोशी की, अमन-चैन की दुआ मांगी

गढ़वा : गढ़वा प्रखंड के हुर गांव के हिंदू व मुसलिम दोनों समुदायों के आस्था का केंद्र बना अंजान शहीद के मजार पर मंगलवार को अकीदतमदों की भीड़ उमड़ी. छत्तीसगढ़ व उत्तर प्रदेश से भी लोग पहुंचे. सुबह होते ही मजार को जिला मुख्यालय से जोड़नेवाली सभी सड़क जाम हो गयी. मजार पर जनप्रतिनिधियों ने […]
गढ़वा : गढ़वा प्रखंड के हुर गांव के हिंदू व मुसलिम दोनों समुदायों के आस्था का केंद्र बना अंजान शहीद के मजार पर मंगलवार को अकीदतमदों की भीड़ उमड़ी. छत्तीसगढ़ व उत्तर प्रदेश से भी लोग पहुंचे.
सुबह होते ही मजार को जिला मुख्यालय से जोड़नेवाली सभी सड़क जाम हो गयी. मजार पर जनप्रतिनिधियों ने भी पहुंच कर चादरपोशी की व अमन चैन की दुआ मांगी. बताया जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब के जमाने में गढ़वा के दानरो नदी के तट पर जो वर्तमान में दबगर मुहल्ला है, वहां जंग हुई थी.
इसमें तीन लोग शहीद हुए थे. इस लड़ाई में शहीद हुए एक योद्धा का मजार हुर गांव में है. बाद में उनके नाम का खुलासा बिहार के दाऊदनगर के पीर साहब ने अब्दुल लतीफ बियाबानी के रूप में किया.
ऐसा माना जाता है कि मजार पर सच्चे दिल से जो भी दुआ मांगता है, उसकी मुराद पूरी होती है. मजार पर लगनेवाले उर्स के संचार के लिए हर वर्ष एक कमेटी का गठन किया जाता है. इस वर्ष के गठित कमेटी में मो कुदुश खां, मो शमीम अंसारी, मो इस्लाम अंसारी, मो शाहीद खां, मो हसीबुल्लाह, मो नजीमरूल अंसारी, रेयाज अंसारी आदि को विभिन्न पदों की जिम्मेवारी सौंपी गयी.
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