मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का निधन, योगी आदित्यनाथ ने बताया अत्यंत दुखद
अपर्णा यादव और प्रतीक यादव
Prateek Yadav : मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और बीजेपी नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की अकस्मात मौत हो गई है. इस घटना से सभी स्तब्ध हैं और अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं.
Prateek Yadav : समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव के निधन पर विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने शोक जताया है. प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे. प्रतीक का बुधवार सुबह संदिग्ध हालात में निधन हुआ, वे 38 साल के थे.
सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रतीक के निधन को दुखद बताया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर अपने शोक संदेश में लिखा कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पद्म विभूषण, दिवंगत मुलायम सिंह यादव के पुत्र एवं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का आकस्मिक निधन अत्यंत दुःखद है. विनम्र श्रद्धांजलि.उन्होंने अपने संदेश में आगे कहा कि मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को सद्गति एवं शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें. ऊं शांति!
शिवपाल सिंह यादव ने निधन को बेहद दुखद बताया
सपा के वरिष्ठ नेता और प्रतीक के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने उनके निधन को बेहद दुखद बताया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने के लिए प्रार्थना की. प्रदेश के एक अन्य उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रतीक के निधन की खबर को बेहद दुखद बताया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने भी प्रतीक यादव के अकस्मात निधन पर दुख व्यक्त किया और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना जताई. उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने प्रतीक के निधन को बहुत दुखद बताया.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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