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कम कीमत पर दूध लिये जाने से पशुपालकों को हो रही है परेशानी

Updated at : 20 Apr 2019 1:02 AM (IST)
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कम कीमत पर दूध लिये जाने से पशुपालकों को हो रही है परेशानी

मझिआंव : झारखंड राज्य डेयरी विकास योजना के तहत राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड (मेघा) द्वारा मझिआंव में संचालित दुग्ध शीतक केंद्र की ओर से पशुपालकों को दूध का सही दाम नहीं दिया जा रहा है. पशुपालकों की शिकायत है कि उनके दूध का उचित मूल्य नही दिया जाता. बाजार में जो दूध 40 […]

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मझिआंव : झारखंड राज्य डेयरी विकास योजना के तहत राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड (मेघा) द्वारा मझिआंव में संचालित दुग्ध शीतक केंद्र की ओर से पशुपालकों को दूध का सही दाम नहीं दिया जा रहा है. पशुपालकों की शिकायत है कि उनके दूध का उचित मूल्य नही दिया जाता. बाजार में जो दूध 40 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.

वहीं दूध इस केंद्र द्वारा 22 रुपये से 27 रुपये प्रति लीटर की दर से क्रय किया जा रहा है़ जबकि गत वर्ष दुग्ध शीतक केंद्र खुलने के बाद इसके पदाधिकारियों ने गांव-गांव जाकर कहा था कि बिना पानी मिलाये गाय का दूध 35 रुपये से 38 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस का दूध 40 से 45 रुपये प्रति लीटर लिया जायेगा. लेकिन केंद्र में स्थित फैट मापनेवाले कंप्यूटर से छेड़छाड़ कर दूध का दाम कम कर क्रय किया जा रहा है. इस संबंध में पशुपालक कृष्णा यादव ने बताया कि उनकी शिकायत के बाद क्षेत्रीय सुपरवाइजर आलोक ओझा निरीक्षण में आये थे.

उनके सामने गाय का दूध दुहवाकर मशीन में चेक किया गया, तो मात्र 22 रुपये लीटर और दूसरे का 26 रुपये व तीसरे का 27 रुपये लीटर बताया गया था. इसी तरह एक और पशु पालक रुस्तम खान का दूध मशीन में छह रुपये लीटर बताया था. जब इस बात से हंगामा शुरू हुआ तो रुस्तम को कंप्यूटर से 20 रुपये लीटर के हिसाब से बिल दिया जा रहा है़.
इसके बाद भी केंद्र संचालक पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है़ पशुपालकों का आरोप है कि 20 रुपये लीटर के हिसाब से पानी का बोतल बाजार में बेचा जा रहा है़ दूध भी उसी कीमत पर लिया जा रहा है. यह किसानों के साथ धोखा है. पशुपालक बलवंत मेहता, वीरेंद्र तिवारी आदि ने बताया कि वे इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि दूध में एक बूंद भी पानी नहीं मिले. बिना मिलावट के दूध का कीमत 26 रुपये तथा 27 रुपये लिया जाना पूरी तरह से उनका शोषण है.
उन्होंन कहा कि दूध को लैक्टोमीटर से मापकर कम से कम 35 रुपये प्रति लीटर मूल्य फिक्स किया जाय. अन्यथा वे सभी उग्र आंदोलन करने पर विवश होंगे और दुग्ध शीतक केंद्र में तालाबंदी कर देंगे़ इधर इस संबंध में क्षेत्रीय सुपरवाइजर आलोक ओझा ने कहा कि दूध का फैट मापने वाली मशीन सही है.
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