गढ़वा के लोग मांग रहे हैं देशी नस्ल के गायों का दूध
Updated at : 31 Jan 2019 12:28 AM (IST)
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शंकर व विदेशी नस्ल के गायों की अपेक्षा गिर, साहिवाल, थरपाड़कर, रेड सिंधी गायों की डिमांड बढ़ी है गढ़वा : पशुपालन वैज्ञानिकों की ओर से एवन मिल्क को शरीर के लिए हानिकारक बताये जाने के बाद से गढ़वा जिले के दूग्ध उत्पादन में भी बदलाव देखने को मिल रहा है़. दूग्ध उत्पादक पशुपालक अब लोगों […]
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शंकर व विदेशी नस्ल के गायों की अपेक्षा गिर, साहिवाल, थरपाड़कर, रेड सिंधी गायों की डिमांड बढ़ी है
गढ़वा : पशुपालन वैज्ञानिकों की ओर से एवन मिल्क को शरीर के लिए हानिकारक बताये जाने के बाद से गढ़वा जिले के दूग्ध उत्पादन में भी बदलाव देखने को मिल रहा है़. दूग्ध उत्पादक पशुपालक अब लोगों की डिमांड पर एवन मिल्क उत्पादन करनेवाली गायों की जगह पर एटू मिल्क उत्पादन करनेवाली गायों को तरजीह देने लगे है़ं. लोगों की डिमांड जर्सी गायों की अपेक्षा अब साहिवाल व गिर नस्ल के गायों के दूध की होने लगी है़.
गिर नस्ल के गाय का दूध गढ़वा जिले में सबसे महंगा 80 रुपये लीटर तक बिक रहा है़ जबकि साहिवाल, रेड सिंधी, थरपाड़कर व अन्य प्रजाति के गायों का दूध 40 से 50 रुपये लीटर तक बेची जा रही है़. उल्लेखनीय है कि हाल ही में यह शोध सामने आया था कि एवन मिल्क जो ज्यादातर शंकर व विदेशी प्रजाति गायों के दूध में पाया जाता है, उसका उपयेाग लंबे समय तक करने से कई प्रकार की शारीरिक बीमारियां होती है़.
जबकि देशी नस्ल के गायों के दूध को एटू मिल्क की कैटेगरी में रखा गया है़ इन गायों का दूध स्वास्थ्य के लिए सही होता है और इसे पीने से शरीर पुष्ट होता है़. इस रिपोर्ट के बाद गढ़वा जिले में संचालित 60 बायफ केंद्रों के माध्यम से प्रजनन करानेवाले पशुपालक देशी नस्ल के गायों का सीमेन की ही डिमांड कर रहे है़ं. इसमें भी सबसे ज्यादा गिर नस्ल के गाय, जिसके दूध को सर्वाधिक लाभदायक माना गया है, तथा उसके मूत्र में सोना पाये जाने का दावा किया जाता है, उसे लोग प्राथमिकता दे रहे है़ं.
पिछले एक साल के दौरान गढ़वा शहर में 20 गिर नस्ल के गाय बाहर के पशु बाजारों से खरीद कर लाया गया है़ शहर में रहनेवाले सरकारी अधिकारी व संपन्न लोगों के बीच गिर नस्ल के गाय की दूध की ज्यादा मांग हो रही है़. लेकिन अभी तक उस अनुरूप इसका दूध पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो सका है़ .
देशी नस्ल के गायों का दूध ही सेवन करें : वैज्ञानिक
इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार ने बताया कि गढ़वा जिले का वातावरण देशी नस्ल के गायों के लिए पूरी तरह से सही है़. उन्होंने कहा कि शंकर नस्ल के गायों के दूध की अपेक्षा लोगों को गढ़वा जिले की मूल पहाड़ी गाय, हरियाणवी, गिर, रेडसिंधी, थड़पारकर, साहिवाल का दूध का सेवन करना चाहिए़.
गिर व साहिवाल की मांग बढ़ी है : रामदेव
इस संबंध में बायफ के गढ़वा व पलामू के प्रभारी रामदेव प्रसाद ने बताया कि गढ़वा जिले में सभी प्रकार के देशी व विदेशी नस्ल के गायों का सीमेन उपलब्ध है़. उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में गिर के साथ-साथ साहिवाल नस्ल के गायों की डिमांड ज्यादा बढ़ी है़. इसलिए उसी अनुरूप वायफ केंद्रों पर सीमेन रखी जा रही है़.
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