100 गांव के लोगों की जरूरत पूरा करता है गरदाहा साप्ताहिक बाजार

Updated at : 14 May 2018 3:40 AM (IST)
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100 गांव के लोगों की जरूरत पूरा करता है गरदाहा साप्ताहिक बाजार

पूर्व मंत्री ददई दुबे ने 13 मई 2000 को रखी थी बाजार की आधारशिला 18 वर्ष पूरे कर चुका यह बाजार गांव के लोगों व व्यवसायियों के लिए वरदान साबित हो रहा है कांडी : कांडी प्रखंड के गरदाहा हाई स्कूल के निकट लगनेवाले साप्ताहिक बाजार में हजारों की संख्या में क्रेता विक्रेताओं को पीने […]

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पूर्व मंत्री ददई दुबे ने 13 मई 2000 को रखी थी बाजार की आधारशिला

18 वर्ष पूरे कर चुका यह बाजार गांव के लोगों व व्यवसायियों के लिए वरदान साबित हो रहा है
कांडी : कांडी प्रखंड के गरदाहा हाई स्कूल के निकट लगनेवाले साप्ताहिक बाजार में हजारों की संख्या में क्रेता विक्रेताओं को पीने का पानी व शेड तथा प्लेटफॉर्म के बिना काफी कठिनाई‎ होती है़ इस अति महत्वपूर्ण‎ बाजार का आज ही के दिन 13 मई 2000 को शुरुआत की गयी थी़ अविभाजित बिहार राज्य में प्रदेश सरकार के श्रम नियोजन व प्रशिक्षण‎ मंत्री सह स्थानीय विधायक चंद्रशेखर दुबे ने पहले दिन के बाजार में प्रथम ग्राहक के रुप में सब्जी की खरीदारी कर इसका उद्घाटन किया था़ उदघाटन के मौके पर काफी संख्या में लोग उपस्थित‎ थे़ अपनी स्थापना के 18 वर्ष पूरे कर चुका यह बाजार गांव के लोगों व व्यवसायियों के लिए वरदान साबित हो रहा है़
इस बाजार की शुरुआत से पहले लोगों को सात से 10 किमी की दूरी तय कर मोहम्मद गंज (पलामू जिला) व 10- 15 किमी की दूरी तय कर कांडी बाजार जाना पड़ता था तथा बाजार करने के बाद पुन: उतनी ही दूरी पैदल तय कर वापस आना पड़ता था़
बाहर से आते हैं व्यापारी
इस बाजार में स्थानीय व्यापारियों के साथ साथ कांडी, मझिआंव, गढ़वा, रेहला, मोहम्मदगंज, हैदर नगर, हुसैनाबाद से लेकर डेहरी सासाराम तक के व्यापारी अपने सामान के साथ आते हैं और सामग्री की बिक्री करते है़ं घोषणा के अनुसार आज तक इस बाजार में किसी भी व्यापारी से एक पैसे की चुंगी या कर की जायज या नाजायज उगाही नहीं की गयी. फलत: यह बाजार व्यवसायियों के लिए सबसे अनुकूल व शांत बाजार है़ बाजार में जुटने वाली आठ से 10 हजार की भीड़ के लिए यहां पेयजल की व्यवस्था नहीं है़ इसके बिना भीड़ को भारी कठिनाई‎ होती है़ यहां कम से कम पांच ड्रील बोर या दो डीप बोर चापाकल लगाना अति आवश्यक है़ साथ ही शेड व प्लेटफॉर्म के बिना गरमी व बरसात में भारी कठिनाई‎ होती है़
25 – 30 सालों से यहां बाजार की थी मांग
केवल खेती बारी व कृषि मजदूरी पर आश्रित इलाके के लोग अनाज के बदले जरूरत के सामान खरीदने में सदियों से ठगे जा रहे थे़ पास में कोई बाजार नहीं था, जहां एक साथ कई दुकानें सजी हो व सही दर पर उनका अनाज बिके व सामान मिल सके़ इस कारण दशकों से प्रखंड के इस मध्य क्षेत्र में एक बाजार की मांग की जा रही थी़ तब क्षेत्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता प्रियरंजन सिन्हा ने युवाओं के सहयोग से इसे सफलीभूत करने की ठानी और काम के दिनों के अंतिम दिवस शनिवार को बाजार के लिए उपयुक्त माना गया़ व्यापक प्रचार प्रसार के बाद इसकी शुरुआत करायी गयी. इस बाजार की सफलता ने सात किमी से 20 किमी तक की दूरी पर अवस्थित बाजारों को प्रभावित कर दिया़ इलाके के लोग सप्ताह भर की जरूरत का सामान खरीद लेते है़ साथ ही अन्य जरूरत के हिसाब से सही दर पर अपना अनाज व अन्य उत्पादों की बिक्री कर लेते है़ं इस बाजार में अनाज, सब्जी, मिठाई, कपड़ा, रेडिमेड, किराना, जूता, शृंगार सामग्री, हल, फाल, कुदाल, टांगी, अंडा, मछली, खड़ा मुर्गा, इलेक्ट्रॉनिक सामान सहित जरूरत के अधिकांश सामान मिलते है़ खरीदारों में करीब सौ गांव के लोग नियमित रूप से शामिल होते है़ं
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