NATO पर फिर भड़के ट्रंप, कहा- जरूरत के वक्त अमेरिका का नहीं दिया साथ

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 09 Apr 2026 1:53 PM

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फोटो पीटीआई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच एक बार फिर नाटो देशों (NATO) पर हमला बोला है. नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ बंद कमरे में हुई बैठक के बाद कहा- जरूरत के समय नाटो अमेरिका के साथ नहीं था.

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सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने लिखा- नाटो हमारे साथ नहीं था, जब हमें उसकी जरूरत थी. और आगे जरूरत पड़ने पर भी नहीं होगा. इससे पहले ट्रंप ने नाटो से अलग होने का संकेत दिया था. व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी कहा था कि ट्रंप नाटो से अलग होने के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं.

कांग्रेस की मंजूरी के बिना नाटो से अलग नहीं हो सकते ट्रंप

अमेरिकी कांग्रेस 2023 में एक कानून पारित कर चुकी है, जिसके तहत कोई भी राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना नाटो से बाहर नहीं हो सकता. ट्रंप लंबे समय से नाटो की आलोचना करते रहे हैं. उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में भी संकेत दिया था कि वह गठबंधन से बाहर निकल सकते हैं.

नाटो की स्थापना क्यों हुई थी?

नाटो की स्थापना 1949 में यूरोप की सुरक्षा के लिए की गई थी. इसके 32 सदस्य देशों के बीच सामूहिक रक्षा समझौता लागू है.

कौन-कौन देश इसमें शामिल हैं?

बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्समबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रीस, टर्की, जर्मनी, स्पेन, चेक गणराज्य, हंगरी, पोलैंड, बुल्गारिया, एस्तोनिया, लातविया, लिथुआनिया, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, अल्बानिया, क्रोएशिया, मोंटेनेग्रो, उत्तरी मैसेडोनिया, फिनलैंड और स्वीडन.

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लेखक के बारे में

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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