सात साल के लंबे इंतजार के बाद विधवा को मिला न्याय, अदालत ने दिलाया मकान पर कब्जा
प्रतीकात्मक फोटो.
East Singhbhum: घाटशिला व्यवहार न्यायालय ने सात वर्ष पुराने भूमि विवाद में विधवा जोबा पात्रो को बड़ी राहत देते हुए उनके हिस्से की जमीन और मकान पर कब्जा दिलाया. न्यायालय के आदेश पर सीमांकन कर संपत्ति का बंटवारा किया गया. फैसले से महिला ने न्यायपालिका पर विश्वास जताया.
घाटशिला से सिद्धार्थ की रिपोर्ट
East Singhbhum: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला व्यवहार न्यायालय ने सात वर्ष से लंबित भूमि एवं मकान विवाद में एक विधवा महिला को न्याय दिलाते हुए विवादित संपत्ति पर उसका वैधानिक कब्जा सुनिश्चित कराया. एसीजेएम-4 अशोक कुमार की अदालत के आदेश पर न्यायालय की निगरानी में विवादित जमीन का सीमांकन कराया गया और विधवा महिला को उसके हिस्से की जमीन एवं मकान पर विधिवत कब्जा दिलाया गया. लंबे समय से चले आ रहे इस मामले के समाधान के बाद पीड़ित महिला ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि न्याय मिलने से उनका विश्वास और स्वाभिमान दोनों सुरक्षित रहे हैं.
वर्ष 2017 में दायर हुआ था टाइटल सूट
जानकारी के अनुसार, दाहीगोड़ा पानी टंकी के समीप स्थित भूमि एवं मकान को लेकर दाहीगोड़ा निवासी कुलीन पात्रो ने वर्ष 2017 में टाइटल सूट (वाद संख्या 04/17) दायर किया था. उन्होंने कमल पात्रो, नंदन कानन पात्रो एवं किशोर पात्रो को प्रतिवादी बनाया था. विवाद पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे और स्वामित्व अधिकार से जुड़ा था. मामला कई वर्षों तक न्यायालय में विचाराधीन रहा और इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए.
वादी की मृत्यु के बाद पत्नी ने संभाली कानूनी लड़ाई
मुकदमे की सुनवाई के दौरान मूल वादी कुलीन पात्रो का निधन हो गया. इसके बाद उनकी पत्नी जोबा पात्रो ने हार नहीं मानी और दिसंबर 2024 में न्यायालय में आवेदन देकर अपने पति के दावे को आगे बढ़ाने तथा अपने वैधानिक अधिकार की मांग की. न्यायालय ने आवेदन पर सुनवाई करते हुए मामले में आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया. इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और विवादित संपत्ति पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए सीमांकन कराने का निर्णय लिया गया.
न्यायालय की निगरानी में हुआ सीमांकन, दिलाया गया कब्जा
एसीजेएम के आदेश पर मंगलवार को न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त मनोज कुमार झा, न्यायालय के नाजिर प्रभात बांद्रा तथा वादी पक्ष के अधिवक्ता मिथिलेश कुमार की मौजूदगी में दाहीगोड़ा स्थित विवादित भूमि एवं मकान का सीमांकन कराया गया. मापी के बाद संपत्ति को पांच हिस्सों में विभाजित किया गया, जिसमें से एक वैधानिक हिस्से पर जोबा पात्रो को विधिवत कब्जा दिलाया गया. पूरी प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, जिससे वर्षों से चले आ रहे विवाद का पटाक्षेप हो गया.
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न्याय मिलने पर भावुक हुईं जोबा पात्रो
अपने हिस्से की जमीन और मकान पर कब्जा मिलने के बाद जोबा पात्रो भावुक नजर आईं. उन्होंने कहा कि वर्षों तक न्याय के लिए संघर्ष करने के बाद आखिरकार अदालत ने उन्हें उनका अधिकार दिलाया है. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर उनका भरोसा पहले भी था और अब यह विश्वास और मजबूत हुआ है. उन्होंने न्यायालय, न्यायिक अधिकारियों और अपने अधिवक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस फैसले ने न केवल उन्हें उनकी संपत्ति दिलाई, बल्कि उनका आत्मसम्मान भी लौटाया. स्थानीय लोगों का भी मानना है कि इस निर्णय से यह संदेश गया है कि कानूनी प्रक्रिया में समय भले लगे, लेकिन न्याय मिलने की उम्मीद बनी रहती है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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