East Singhbhum News : गालूडीह : लेदासाल पहाड़ पूजा में झारखंड व बंगाल के ग्रामीणों की उमड़ी भीड़

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 22 Jun 2025 11:38 PM

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अच्छी बारिश व बेहतर खेती के लिए ग्रामीणों ने की पहाड़ पूजा

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गालूडीह. घाटशिला प्रखंड के पीड्राबांद-हलुदबनी गांव से सटे सुखना पहाड़ की तलहटी पर रविवार को लेदासाल पहाड़ की पूजा हुई. यहां वर्ष 1809 से पहाड़ की पूजा हो रही है. बांग्ला तारीख के अनुसार आषाढ़ माह के सातवें दिन यहां पहाड़ पूजा होती है. इस वर्ष 216वें वर्ष यहां पहाड़ पूजा हुई. घाटशिला अनुमंडल में लेदासाल पहाड़ पूजा सबसे पहले होती है. इसके बाद अन्य जगहों पर पहाड़ पूजा शुरू होती है. लेदासाल पहाड़ पूजा में झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती सैकड़ों गांव के अनेक ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी. अच्छी बारिश, बेहतर खेती और गांव को निरोग रखने के साथ-साथ हिंसक जंगली जानवरों से बचाव के लिए ग्रामीणों ने पहाड़ की पूजा की. मान्यता है कि यहां पूजा के साथ झमाझम बारिश होती है. लेदासाल पहाड़ की पूजा सबर पुजारी (नायके) मुसला सबर ने की. परंपरा रही है कि सबर ही यहां पूजा करते हैं. जिनकी मन्नतें पूरी हुईं वैसे लोग बकरे, मुर्गे की बलि चढ़ाकर पूजा की. पहाड़ी देवता के प्रति दोनों राज्यों के लोगों की असीम आस्था है. सुबह से पहाड़ पर भीड़ जुटने लगी थी. महिला-पुरुष और युवा पहाड़ पर पहुंचे और पारंपरिक तरीके से पूजा की.

हिंसक जानवरों से बचाव और बाघ-हाथी व वन्य प्राणियों की रक्षा को लेकर भी हुई पूजा

लेदासाल पहाड़ पूजा में हिंसक जंगली जानवरों से इंसानों और गांवों की रक्षा के साथ बाघ- हाथी समेत वन्य प्राणियों की रक्षा की कामना को लेकर पूजा की गयी. साथ संतान प्राप्ति के लिए महिलाों ने मन्नत मांगी गयी. पहाड़ पूजा के आयोजन में हलदुबनी, पीड्राबांद, राजाबासा के ग्रामीण ने सहयोग किया. पूजा में महुलिया, हेंदलजुड़ी, उलदा, जोड़सा, बाघुड़िया आदि पंचायत के लोग और बंगाल के कई गांवों के लोग शामिल हुए. पूजा के दौरान कमेटी ने सदस्यों ने भोग वितरण किया.

पाता नाच, लांगड़े नाच और सांस्कृतिक कार्यक्रम में झूमे ग्रामीण

लेदासाल पहाड़ पूजा अवसर पर पाता नाच, लांगड़े नाच समेत कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गये. शाम को पीड्राबांद में डीजे लांगड़े डांस प्रतियोगिता, स्पोर्ट्स प्रतियोगिता, डीजे लांगड़े एनेज सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ. पूजा स्थल पर पहाड़ के नीच मेला भी लगा है. यहां कई तरह की दुकानें सजी थीं. सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ रही. पहाड़ पूजा में पीड्राबांद के ग्राम प्रधान लक्ष्मण मुर्मू, हलुदबनी के ग्राम प्रधान कालीचरण मार्डी, कमेटी के रसराज बेसरा, घासीराम टुडू, बोदीनाथ महतो, छोटो मुर्मू, मिथुन बेसरा, लखन बेसरा, देवलाल महतो, सुनील टुडू, बबलू मुर्मू, जुझार सोरेन, राजू टुडू, लालमोहन महतो, गंभीर सिंह, लालटू सिंह, राकेश टुडू आदि ने अहम भूमिका निभायी.

पहाड़ की तलहटी पर एक झरना जो सालों भर नहीं सूखता

लेदासाल पहाड़ की तलहटी पर जहां पहाड़ पूजा होती वहां एक प्राकृतिक झरना है. जो सालों भर नहीं सूखता है. बरसात में वह झरना भर गया है. पिछले वर्ष विधायक रामदास सोरेन के कोष से यहां प्राकृतिक झरना का सौंदर्यीकरण हुआ है. चारों ओर घेराबंदी कर कुंए की तरह बनाया गया है. एक तरफ रास्ता छोड़ा गया है, जिससे लोग पानी लेते हैं. झरना भर जाने से जहां से रास्ता छूटा वहां से बह कर पानी निकल जाता है. पहाड़ पूजा करने आये लोग इसी झरना का पानी पूजा में उपयोग करते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि हाथी समेत अन्य वन्य प्राणी इसी झरने से प्यास बुझाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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