East Singhbhum News : मुश्किलों से भरी है पहाड़ पर बसे मिर्गीटांड़ के ग्रामीणों की जिंदगी

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 31 Jul 2025 11:59 PM

विज्ञापन

गालूडीह. पहले नक्सली, फिर हाथी व बाघ और अब मलेरिया के मच्छरों से परेशानी

विज्ञापन

गालूडीह. पहाड़ पर बसे मिर्गीटांड़ के ग्रामीणों की जिंदगी मुश्किलों से भरी है. पहले नक्सली, फिर हाथी, बाघ और अब मलेरिया के मच्छरों ने जीना दुश्वार कर दिया है. इन दिनों पहाड़ी गांव के घर-घर में बच्चे, युवा, महिला-पुरुष, जवान बीमार पड़े हैं. कई मलेरिया से पीड़ित हैं. कई टाइफाइड व वायरल फीवर से. ग्रामीण कहते हैं कि पहाड़ पर बसे गांव में रहना मुश्किल हो गया है. पहले नक्सली से वर्षों तक परेशान रहे. रात में नक्सली, तो दिन में पुलिस की धमक रहती थी. इसके बाद जंगली हाथियों का तांडव हुआ. इस बीच बाघ के आतंक का सामना करना पड़ा. अब मलेरिया के मच्छरों के डंक की मार झेल रहे हैं.

गांव के हर घर में बीमार पड़े हैं लोग

मिर्गीटांड़ के रामचंद्र किस्कू बताते हैं कि पहले उसके बच्चे बीमार पड़े. फिर पत्नी और वे खुद मलेरिया से ग्रसित होकर बिस्तर पर पड़ गये हैं. मजदूरी नहीं कर पा रहे हैं. खाने पर आफत है. राशन का चावल के लिए सात किमी पहाड़ी रास्ते पार कर नरसिंहपुर जाना पड़ता है. ऐसे में बीमारी की हालत में जाना मुश्किल होता है. इस बार लगातार बारिश से मकई की खेती भी बर्बाद हो गयी है. ऊपर से बीमारी से काम पर नहीं जा पा रहे हैं. भादो के महीने में खायेंगे क्या? इसकी चिंता है. यही हालत गांव में हर परिवार की है.

मलेरिया जोन के रूप में चिह्नित है गांव

घाटशिला की बाघुड़िया पंचायत में पहाड़ पर बसे मिर्गीटांड़ गांव में 40 से अधिक घर है. गांव चारों ओर पहाड़ से घिरा है. गांव को स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया जोन के रूप में चिह्नित किया है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना कुछ वर्षों से यहां मलेरिया के केस कम हो गये थे. इस बार यहां मलेरिया का ज्यादा प्रकोप बढ़ा है. स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांव में कैंप कर ब्लड सैंपल लेकर जांच कर रही दवा दे रही है. इस गांव से सटे बीहड़ गांव डुमकाकोचा में भी कमोवेश ऐसे ही हाल है.

टावर अधूरा, मोबाइल काम नहीं करता

मिर्गीटांड़ गांव में कई वर्ष से बीएसएनएल का टावर बन रहा है. अबतक अधूरा है. इससे यहां मोबाइल काम नहीं करता है. यहां के मरीजों को काफी परेशानी हो रही है. घर में किसी की तबीयत खराब होती है, तो डॉक्टर को फोन कर बुला नहीं पाते हैं. बाइक या साइकिल पर किसी तरह मरीज को लाद कर पहले केशरपुर आरएमपी डॉक्टर के पास पहुंचते हैं या आयुष्मान आरोग्य केंद्र. ठीक नहीं होने पर फिर गालूडीह इलाज के लिए आना पड़ता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
ATUL PATHAK

लेखक के बारे में

By ATUL PATHAK

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola