डगमगा रही बकाया और आश्वासनों के नाव पर सवार गोविंदपुर जलापूर्ति योजना

29 नवंबर को हुडको वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के सामने मजदूरों ने किया था विरोध. अब तक नहीं मिला वेतन. फोटो : प्रभात खबर
Govindpur Water Supply Scheme News: गोविंदपुर जलापूर्ति योजना से 21 पंचायतों में लगभग 1.5 लाख कनेक्शन दिया गया है. एक परिवार में औसतन चार सदस्य मानें, तो करीब 6 लाख की आबादी इससे जुड़ी है. वर्तमान में जलापूर्ति विभाग ने योजना के संचालन का जिम्मा एजेंसी जेमिनी इंटरप्राइसेस को दिया है.
Table of Contents
Govindpur Water Supply Scheme: मशहूर व्यंग्यकार शरद जोशी की एक किताब है- ‘घाव करें गंभीर’. इस पुस्तक में छोटी लोककथाओं के जरिये व्यवस्था पर व्यंग्य करती कई रचनाएं हैं. गोविंदपुर जलापूर्ति योजना की स्थिति भी यही हो गयी है. बकाया और आश्वासनों के नाव पर सवार जलापूर्ति योजना डगमगाने लगी है. 21 पंचायतों के लोगों की प्यास बुझाने के लिए बनी योजना अब समाधान नहीं, समस्या बन गयी है. एजेंसी, मजदूरों और आम लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही है. कारण यह कि जिस एजेंसी को योजना के संचालन का जिम्मा है, उसे 24 महीने से राशि नहीं मिली है.
एजेंसी का बकाया बढ़कर 3.6 करोड़ रुपए हुआ
एजेंसी का बकाया बढ़कर 3.6 करोड़ रुपए हो गया है. एजेंसी के तहत काम करनेवाले 34 मजदूरों को दिसंबर मिलाकर 6 माह से वेतन नहीं मिला है. इसलिए, एजेंसी और मजदूरों ने अब पूरी तरह काम बंद कर देने की चेतावनी दे दी है. इधर, जिला प्रशासन है कि बार-बार सिर्फ आश्वासन से ही काम चला रही है. बकाया की मांग पर एजेंसी व मजदूरों के विरोध के बाद डीसी ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही समस्या का समाधान निकाल लिया जायेगा. लेकिन, अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाये जा सके हैं. न एजेंसी को बकाया मिला और न ही मजदूरों को वेतन मिला.
- मजदूरों और एजेंसी का कहना है कि पैसे नहीं होने से काम करना
- संभव नहीं, जनता बोली- क्यों नहीं निकाला जा रहा ठोस समाधान
योजना के संचालन में पैसे का गणित ऐसे समझिए
गोविंदपुर जलापूर्ति योजना से 21 पंचायतों में लगभग 1.5 लाख कनेक्शन दिया गया है. एक परिवार में औसतन चार सदस्य मानें, तो करीब 6 लाख की आबादी इससे जुड़ी है. वर्तमान में जलापूर्ति विभाग ने योजना के संचालन का जिम्मा एजेंसी जेमिनी इंटरप्राइसेस को दिया है. एजेंसी के ठेकेदार का कहना है कि योजना के संचालन में प्रति माह 15 लाख रुपए का खर्च आता है. इसमें 34 मजदूरों के वेतन पर प्रतिमाह 5 लाख रुपए और सफाई, फिटकरी, केमिकल, बिजली व अन्य मद में करीब 10 लाख रुपए का खर्च आते हैं. 15 लाख गुना 24 = 3.6 करोड़ रुपए हो जायेंगे. बकाया नहीं मिलने से योजना का संचालन अब संभव नहीं है.
झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
Govindpur Water Supply Scheme: मजदूरों की पीड़ा – 6 महीने से पैसे नहीं मिले, घर कैसे चलायें
एजेंसी में काम कर रहे 34 मजदूरों ने बकाया वेतन की मांग को लेकर 29 नवंबर को हुडको वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के सामने विरोध-प्रदर्शन किया था. इसके बाद हड़ताल पर चले गये थे. इससे 21 पंचायतों में पानी की सप्लाई ठप हो गया थी. इसके बाद उन्हें जल्द ही बकाया वेतन देने का आश्वासन दिया गया था. लेकिन, ऐसा नहीं हुआ. मजदूरों का कहना है कि दिसंबर को मिलाकर छह माह का वेतन बकाया हो जायेगा. पैसे नहीं रहने के कारण घर चलाना भी मुश्किल है. मजदूरों का कहना है कि जनवरी में टुसू पर्व से पहले उन्हें छह माह का बकाया वेतन नहीं मिला, तो काम पूरी तरह बंद कर देंगे. इधर, 34 मजदूर गुरुवार को प्रखंड प्रमुख से मिलकर अपनी बातों को रखना चाहते थे. लेकिन, प्रमुख के नहीं रहने के कारण ऐसा नहीं हो पाया. मजदूरों को शुक्रवार को मिलने का समय दिया गया है.
एजेंसी ने कहा- पैसे नहीं मिल रहे, 25 दिसंबर से बंद कर देंगे सप्लाई
एजेंसी जेमिनी इंटरप्राइजेस के ठेकेदार अरुण कुमार का कहना है कि दिसंबर को मिलाकर 24 महीने का बकाया हो जायेगा. अब तक करोड़ों रुपए का बकाया हो चुका है. बैंक से कर्ज लेकर जलापूर्ति योजना को चला रहा हूं. पूर्व की राशि नहीं चुका पाने के कारण अब बैंक भी कर्ज देने से आनाकानी कर रही है. जिसकी वजह से मेरा सिविल खराब हो रहा है. वहीं, मजदूरों को छह माह का वेतन देने के लिए 30 लाख रुपए चाहिए. जिला प्रशासन और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को बार-बार पत्राचार करके थक गया हूं. ऐसे में अब जलापूर्ति योजना को आगे चलाने में असमर्थ हूं. 25 दिसंबर से अनिश्चितकालीन पानी की सप्लाई बंद कर दी जायेगी.
जनता बोल रही- पैसे देने पर भी नियमित नहीं हो रही जलापूर्ति
बकाया और आश्वासनों के भंवर में फंसी 21 पंचायतों की जनता बेहाल है. लोगों का कहना है कि पानी के लिए मासिक शुल्क अदा करने पर भी बार-बार जलापूर्ति बंद होने से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. क्यों ऐसी स्थिति लगातार उत्पन्न हो रही है? क्यों समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाल जा रहा है. ऐसे में हम क्या करें, समझ नहीं आ रहा है.
प्रखंड प्रमुख बोलीं- प्रशासन व जलापूर्ति विभाग समाधान निकाले
जमशेदपुर प्रखंड प्रमुख सह एमवीडब्ल्यूएससी अध्यक्ष पानी सोरेन का कहना है कि वर्तमान में जो समस्याएं हैं, उसका समाधान जिला प्रशासन व जलापूर्ति विभाग को करना है. क्योंकि वर्ष 2027 तक छोटागोविंदपुर जलापूर्ति योजना के संचालन व मेंटेनेस का जिम्मा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का है. विभाग एजेंसी के माध्यम से काम करा रही है. जब पंचायत प्रतिनिधियों को योजना हैंडओवर होगी, तब हमारी जवाबदेही होगी. जहां तक पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा सहयोग की बात है, तो पंचायत प्रतिनिधि हमेशा सहयोग के लिए तत्पर हैं.
इसे भी पढ़ें
Jamshedpur News : गोविंदपुर : ग्रिल और लोहे का एंगल चोरी कर भाग रहे चार युवक गिरफ्तार
Seraikela Kharsawan News : खरसावां जलपूर्ति योजना की रफ्तार सुस्त, 2 साल बाद भी नहीं पहुंचा पानी
जमशेदपुर में 7.77 करोड़ की लागत से बनेंगे 2 टैंक, 1500 घरों तक पहुंचेगा पीने का पानी
प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




